saleeqe se agar todhen to kaante toot jaate hain | सलीक़े से अगर तोड़ें तो काँटे टूट जाते हैं

  - Waseem Nadir

सलीक़े से अगर तोड़ें तो काँटे टूट जाते हैं
मगर अफ़्सोस ये है फूल पहले टूट जाते हैं

मोहब्बत बोझ बन कर ही भले रहती हो काँधों पर
मगर ये बोझ हटता है तो काँधे टूट जाते हैं

बिछड़ कर आप से ये तजरबा हो ही गया आख़िर
मैं अक्सर सोचता था लोग कैसे टूट जाते हैं

मिरी औक़ात ही क्या है मैं इक नन्हा सा आँसू हूँ
बुलंदी से तो गिर कर अच्छे अच्छे टूट जाते हैं

बहुत दिन मस्लहत की क़ैद में रहते नहीं जज़्बे
मोहब्बत जब सदा देती है पिंजरे टूट जाते हैं

ज़ियादा कामयाबी भी बहुत नुक़सान देती है
फलों का बोझ बढ़ने से भी पौधे टूट जाते हैं

सितम ये है मैं उस रस्ते पे नंगे पैर चलता हूँ
जहाँ चलते हुए लोगों के जूते टूट जाते हैं

  - Waseem Nadir

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