Mumtaz Naseem

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@mumtaz-naseem

Mumtaz Naseem shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Mumtaz Naseem's shayari and don't forget to save your favorite ones.

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Sher

किसी बे-वफ़ा से बिछड़ के तू मुझे मिल गया भी तो क्या हुआ मेरे हक़ में वो भी बुरा हुआ मेरे हक़ में ये भी बुरा हुआ — Mumtaz Naseem
तुझे कैसे इल्म न हो सका बड़ी दूर तक ये ख़बर गई तिरे शहर ही की ये शाएरा तिरे इंतिज़ार में मर गई — Mumtaz Naseem

Ghazal

चलते चलते ये हालत हुई राह में बिन पिए मय-कशी का मज़ा आ गया पास कोई नहीं था मगर यूँँ लगा कोई दिल से मिरे आ के टकरा गया आज पहले-पहल तजरबा ये हुआ ईद होती है ऐसी ख़बर ही न थी चाँद को देखने घर से जब मैं चली दूसरा चाँद मेरे क़रीब आ गया ऐ हवा-ए-चमन मुझ पे एहसाँ न कर निकहत-ए-गुल की मुझ को ज़रूरत नहीं इश्क़ की राह में प्यार के इत्र से मेरे सारे बदन को वो महका गया हिज्र का मेरे दिल में अँधेरा किए वो जो परदेस में था बसेरा किए जिस के आने का कोई गुमाँ भी न था दफ़्अ'तन मुझ को आ के वो चौंका गया रंग 'मुमताज़' चेहरे का ऐसा खिला ज़िंदगी में नया हादिसा हो गया आइना और मैं दोनों हैरान थे मैं भी शर्मा गई वो भी शर्मा गया — Mumtaz Naseem
तुझे कैसे इल्म न हो सका बड़ी दूर तक ये ख़बर गई तिरे शहर ही की ये शाएरा तिरे इंतिज़ार में मर गई कोई बातें थीं कोई था सबब जो मैं वा'दा कर के मुकर गई तिरे प्यार पर तो यक़ीन था मैं ख़ुद अपने आप से डर गई वो तिरे मिज़ाज की बात थी ये मिरे मिज़ाज की बात है तू मिरी नज़र से न गिर सका मैं तिरी नज़र से उतर गई है ख़ुदा गवाह तिरे बिना मिरी ज़िंदगी तो न कट सकी मुझे ये बता कि मिरे बिना तिरी उम्र कैसे गुज़र गई वो सफ़र को अपने तमाम कर, गई रात आएँगे लौट कर ये 'नसीम' मैं ने सुनी ख़बर तो मैं शाम ही से सँवर गई — Mumtaz Naseem
जिसे मैं ने सुब्ह समझ लिया कहीं ये भी शाम-ए-अलम न हो मिरे सर की आप ने खाई जो कहीं ये भी झूटी क़सम न हो वो जो मुस्कुराए हैं बे-सबब ये करम भी उन का सितम न हो मैं ने प्यार जिस को समझ लिया कहीं ये भी मेरा भरम न हो तू जो हस्ब-ए-वादा न आ सका तो बहाना ऐसा नया बना कि तिरा वक़ार भी कम न हो मिरा ए'तिबार भी कम न हो जिसे देख कर मैं ठिठक गई उसे और ग़ौर से देख लूँ ये चमक रहा है जो आइना कहीं तेरा नक़्श-ए-क़दम न हो मिरे मुँह से निकला ये बरमला तुझे शाद कामराँ रखे ख़ुदा तू पयाम लाया है यार का तिरी उम्र ख़िज़्र से कम न हो — Mumtaz Naseem