
मैं पहले हारी थी इस बार हारने की नहीं
तू जा रहा है तो जा मैं पुकारने की नहीं
मुझे पहाड़ों पे मौसम का लुत्फ़ लेना है
मैं तेरे कमरे में सर्दी गुज़ारने की नहीं
— Mumtaz Naseem
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