कोई संसार में उस के जैसा नहीं
होगा भी पर मुझे सिर्फ़ दिखता नहीं
बस न्यूटन जी की आबरू के लिए
उड़ तो सकता हूँ लेकिन मैं उड़ता नहीं
ज़िन्दगी मेरी नज़रों से तू गिर चुकी
और मैं भी गिरी चीज़ रखता नहीं
— Abdulla Asif
होगा भी पर मुझे सिर्फ़ दिखता नहीं
बस न्यूटन जी की आबरू के लिए
उड़ तो सकता हूँ लेकिन मैं उड़ता नहीं
ज़िन्दगी मेरी नज़रों से तू गिर चुकी
और मैं भी गिरी चीज़ रखता नहीं
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