Sabahat Urooj

Sabahat Urooj

@sabahat-urooj

Sabahat Urooj shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Sabahat Urooj's shayari and don't forget to save your favorite ones.

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Sher

मजबूरी में रक़ीब ही बनना पड़ा मुझे महबूब रहके मेरी जो इज़्ज़त नहीं हुई — Sabahat Urooj

Ghazal

रेआ'या दे रही थी शौक़ से बेगार जिस्मों की यही तक़दीर है आक़ा यहाँ नादार जिस्मों की गिरा डालेगी तुझ पे आसमाँ जो सरसराहट है तुम्हारे पाँव नीचे रेंगते बेदार जिस्मों की मुअर्रिख़ गोलियों के ख़ोल गिनते जा रहे थे और हिकायत लिख रहे थे हम यहाँ मिस्मार जिस्मों की मोहब्बत सिर्फ़ कहने को तअल्लुक़ तेल पानी सा रियाज़त उम्र भर करते रहे बे-कार जिस्मों की ख़ुदा तेरा निज़ाम-ए-अद्ल रब्ब-उल-आलमीं तेरा शरीअ'त तुझ को देती है इजाज़त चार जिस्मों की उसे तो फ़िक्र दामन-गीर थी शह के क़सीदे की कहानी इक तरफ़ रक्खी रही बीमार जिस्मों की बदन छोड़ो सबाहत हो सके तो रूह को थामो कोई दम गिरने वाली है यहाँ दीवार जिस्मों की — Sabahat Urooj
एक तमन्ना ऐसी जो दरकार नहीं एक पहेली है जो पुर-असरार नहीं कहीं पे घर ख़ाली है कोई लोग नहीं कहीं पे लोग बहुत हैं पर दीवार नहीं तेरा उस को छोड़ के जीना ऐसा है एक कहानी पूरी है किरदार नहीं मिलने की उम्मीद कहीं पर रक्खी है बोझ किसी के हिज्र का है जो बार नहीं एक सुहूलत हासिल हो जाए मुझ को उस की ख़ातिर लेकिन मैं तय्यार नहीं भाव नहीं मालूम कि किस का कितना है मैं बे-मोल तो हूँ लेकिन बे-कार नहीं हम-आहंग भी होते हैं पर दुनिया में तेरे मेरे जैसी कुछ तकरार नहीं कम है लेकिन अच्छा ख़ासा लिक्खा है शे'र का मतलब शे'र है अब अम्बार नहीं — Sabahat Urooj