एक तमन्ना ऐसी जो दरकार नहीं

एक पहेली है जो पुर-असरार नहीं

कहीं पे घर ख़ाली है कोई लोग नहीं
कहीं पे लोग बहुत हैं पर दीवार नहीं

तेरा उस को छोड़ के जीना ऐसा है
एक कहानी पूरी है किरदार नहीं

मिलने की उम्मीद कहीं पर रक्खी है
बोझ किसी के हिज्र का है जो बार नहीं

एक सुहूलत हासिल हो जाए मुझ को
उस की ख़ातिर लेकिन मैं तय्यार नहीं

भाव नहीं मालूम कि किस का कितना है
मैं बे-मोल तो हूँ लेकिन बे-कार नहीं

हम-आहंग भी होते हैं पर दुनिया में
तेरे मेरे जैसी कुछ तकरार नहीं

कम है लेकिन अच्छा ख़ासा लिक्खा है
शे'र का मतलब शे'र है अब अम्बार नहीं

— Sabahat Urooj

More by Sabahat Urooj

Other ghazal from the same pen

See all from Sabahat Urooj →

Good Morning Shayari

Shers of good morning.

All Good Morning Shayari poetry →

Similar writers

Voices in the same orbit

Browse by mood

Poetry by feeling