मुहब्बत नज़र का फ़क़त हादसा है
वो ख़ुश है जो इस हादसे से बचा है
वफ़ा का पता पूछ लो हर किसी से
कहेंगे यही सब वफ़ा लापता है
जिसे भी ज़रूरत हो ले ले मिरा दिल
ये पुरज़ा निकम्मा है बेकार का है
रईसी को दौलत से तौला है तुम ने
बताऊँ तुम्हें दिल का ये मसअला है
— Abdulla Asif















