Raqeeb Shayari - Poetic Verses Reflecting Rivalry and Emotions

Explore a captivating collection of Raqeeb Shayari that beautifully captures the emotions of rivalry, jealousy, and unspoken feelings. These poetic lines reflect the complexities of love triangles and the tension between raqeeb (rivals).

Best Raqeeb Shayari on Rivalry and Love

raqeeb shayari
दुश्मनी कर मगर उसूल के साथ
मुझ पर इतनी सी मेहरबानी हो

मेरे मे'यार का तक़ाज़ा है
मेरा दुश्मन भी ख़ानदानी हो
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Akhtar Shumar
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दुश्मनी का सफ़र इक क़दम दो क़दम
तुम भी थक जाओगे हम भी थक जाएँगे
Bashir Badr
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है दुआ जल्दी जन्नत अता हो तुझे
तू मेरे इश्क़ का इश्क़ है ऐ रक़ीब
Prit
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रक़ीब आकर बताते हैं यहाँ तिल है वहाँ तिल है
हमें ये जानकारी थी मियाँ पहले बहुत पहले
Anand Raj Singh
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उस लड़की के जाने से बस ये बदला
प्यारी-प्यारी ग़ज़लें होना छूट गई
Shaad Imran

Heart Touching Raqeeb Shayari in Hindi

कुछ ख़ास तो बदला नहीं जाने से तुम्हारे
बस राब्ता कम हो गया फूलों की दुकाँ से
Ashu Mishra
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लुत्फ़ आता है बहुत सोच के मुझको कि रक़ीब
रंगत-ए-लब को तेरी पान समझते होंगे
Ameer Imam
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शराफ़त ने मुझको कहीं का न छोड़ा
रक़ीब अपने ख़त मुझसे लिखवा रहे हैं
Rajesh Reddy
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दो लफ्ज़ शायरी की बदल कर चुरा लिया
बारात ला, रक़ीब ने अपना बना लिया

चक्कर लगा लगा के भी मेरी नहीं हुई
मंडप के सात फेरे से रिश्ता बना लिया
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RAAHI
हम ने छोड़ा तुम्हें था कह देंगे
ख़ुश रहो तुम रक़ीब शाद रहे
Ashutosh Kumar "Baagi"

Emotional Raqeeb Shayari on Jealousy and Longing

आप बच्चों का दिल नहीं तोड़ें
भाई ये दुश्मनी हमारी है
Vishnu virat
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तुम्हारे ख़त में नया इक सलाम किसका था
न था रक़ीब तो आख़िर वो नाम किसका था
Dagh Dehlvi
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इस आसमां को मुझसे है क्या दुश्मनी "अली"?
भेजूं अगर दुआ भी तो सर पर लगे मुझे
Ali Rumi
छोड़ उदासी अब थोड़ा मुस्काया जाए
बिन भावों के गीत कहाँ तक गाया जाए

इस होली पर रंग मुहब्बत का बरसे
छोड़ दुश्मनी दुश्मन गले लगाया जाए
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DEVANSH TIWARI
मेरे नाम से उसने नाम उसका कुछ ऐसे बदला जैसे
भाड़ा ज़्यादा मिलने पर किराएदार बदल दिए जाते हों
Prit

Beautiful Raqeeb Shayari in Urdu

दश्त छोड़े हुए अब तो अरसा हुआ
मैं हूँ मजनूँ मगर नाम बदला हुआ

मुझको औरत के दुख भी पता हैं कि मैं
एक लड़का हूँ बेवा का पाला हुआ
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Rishabh Sharma
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नाज़ क्या इस पे जो बदला है ज़माने ने तुम्हें
मर्द हैं वो जो ज़माने को बदल देते हैं
Akbar Allahabadi
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दुश्मनी जम कर करो लेकिन ये गुंजाइश रहे
जब कभी हम दोस्त हो जाएँ तो शर्मिंदा न हों
Bashir Badr
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वसिय्यत में मिली है दुश्मनी हमको यहाँ साहब
नहीं चर्चे थे कम वर्ना हमारी दोस्ती के भी
Shivam Mishra
इश्क़ में कुछ भी तो नहीं बदला
है ग़ज़ाला वही वही साहिल
A R Sahil "Aleeg"

Short Raqeeb Shayari for Instagram Captions

मैं चाहता यही था सब चाह ख़त्म हो अब
फिर चाहकर तुम्हें बदला ये ख़याल मेरा
Abhay Aadiv
दुश्मनी लाख सही ख़त्म न कीजे रिश्ता
दिल मिले या न मिले हाथ मिलाते रहिए
Nida Fazli
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शिकस्ता नाव समझ कर डुबोने वाले लोग
न पा सके मुझे साहिल पे खोने वाले लोग

ज़रा सा वक़्त जो बदला तो हम पे हँसने लगे
हमारे काँधे पे सर रख के रोने वाले लोग
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Kashif Sayyed
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मिरा रक़ीब भी उस शहर में है वो हैं जहाँ
मैं जो भी सोच रहा हूँ वो हो रहा है कहीं
Faiz Ahmad
दुश्मनों की दुश्मनी कुछ भी नहीं
दोस्तों की बे-रुख़ी के सामने
Jawed ahmad

Poetic Raqeeb Shayari on Unspoken Emotions

उस ने इस तरह से बदला है रवय्या अपना
पूछना पड़ता है हर वक़्त, तुम्हीं हो ना दोस्त?
Inaam Azmi
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ज़रा सा वक़्त जो बदला तो हम पे हँसने लगे
हमारे काँधे पे सर रख के रोने वाले लोग
Kashif Sayyed
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मजबूरी में रक़ीब ही बनना पड़ा मुझे
महबूब रहके मेरी जो इज़्ज़त नहीं हुई
Sabahat Urooj
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दुश्मनी मुल्कों की ही मासूमियत है खा गईं
वहशतें ही इस वजह से ज़ेहन पर हैं छा गईं
Manish
यादों के कलेंडर में अभी साल न बदला
बदले हैं नगर हमने मगर हाल न बदला
SHIV SAFAR

Raqeeb Shayari on Love Triangles

ज़रा मौसम तो बदला है मगर पेड़ों की शाख़ों पर नए पत्तों के आने में अभी कुछ दिन लगेंगे
बहुत से ज़र्द चेहरों पर ग़ुबार-ए-ग़म है कम बे-शक पर उन को मुस्कुराने में अभी कुछ दिन लगेंगे
Javed Akhtar
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ख़ास तो कुछ भी नहीं बदला तुम्हारे बाद में
पहले गुम रहता था तुम में, अब तुम्हारी याद में

मोल हासिल हो गया है मुझको इक-इक शे'र का
सब दिलासे दे रहे हैं मुझको "जस्सर" दाद में
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Avtar Singh Jasser
चार दिन झूठी बाहों के आराम से
मेरी बिखरी हुई ज़िंदगी ठीक है

दोस्ती चाहे जितनी बुरी हो मगर
प्यार के नाम पर दुश्मनी ठीक है
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SHIV SAFAR
सर्दी ने फिर मिज़ाज बदला है
गाँव की ट्रेन पकड़ी है उसने
100rav
मैं समझा ही नहीं कुछ भी कि ऐसा क्या हुआ है
किनारा कर लिया तुमने चलो अच्छा हुआ है

बहुत पहले से ही मैं देखकर ये सोचता था
न जाने क्या हुआ लहजा ये क्यों बदला हुआ है
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Prashant Arahat

Thoughtful Raqeeb Shayari on Heartbreak and Competition

चले जाओ मगर इतनी मदद करते हुए जाओ
मैं तन्हा मर न जाऊँ दो अदद करते हुए जाओ

चराग़ों की जलन से ख़त्म हो जाती है तारीक़ी
हसद करते हुए आओ हसद करते हुए जाओ
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Muzdum Khan
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तुमसे जो मिला हूँ तो मेरा हाल है बदला
पतझड़ में भी जैसे के कोई फूल खिला हो
Haider Khan
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ऐसा बदला हूँ तिरे शहर का पानी पी कर
झूट बोलूँ तो नदामत नहीं होती मुझ को
Shahid Zaki
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चाह रक़ीब यहाँ रखते हैं अब उसके लब की
मैं तो केवल भूखा था उसकी पेशानी का
Sandeep dabral 'sendy'
उसी से दुश्मनी करने लगा था
जिसे मैं घर में लाना चाहता था
Tiwari Jitendra

Raqeeb Shayari on Strength and Resilience

अगर रक़ीब न होते तो दोस्त होते आप
हमारे शौक़, ख़यालात एक जैसे हैं
Amulya Mishra
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अब आ भी जाओ के सुकूंँ मिले मुझे
अगर जो जाना था तो क्यूंँ मिले मुझे

ज़माना हो न हो रकी़ब बीच में
तू अब कभी मिले तो यूंँ मिले मुझे
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Faiz Ahmad
कच्चा सा घर और उस पर जोरों की बरसात है
ये तो कोई खानदानी दुश्मनी की बात है
Saahir
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ख़ाक बस्तियों में घर रेत के बनाओगे
रोज़ रोज़ ऐसे ही ख़ूब चोट खाओगे

सोचते तो हैं हम भी छत से कूद जाएँ अब
फिर ख़याल आता है तुम कहाँ पे जाओगे

जो हमारे हो कर भी हर किसी को देखोगे
बे-वफ़ा की गिनती में यार आ ही जाओगे

बे-नक़ाब होकर के हम निकल तो आएँगे
हो गया कहीं कुछ भी हमपे टिन-टिनाओगे

शब के आठ बजते ही तुम कहाँ पे जाते हो
कोई पूछ बैठा फिर बोलो क्या बताओगे

जब रक़ीब बनकर ही कुछ नहीं हुआ तुमसे
तुम हबीब बनकर क्या बस्तियाँ जलाओगे

जब नज़र झुकाओगे बात बन ही जाएगी
प्यार से जो बोलेंगे तुम भी मान जाओगे

इश्क़ का मुहब्बत का जब बुख़ार आएगा
वक़्त पर दवा लेना ख़ुद ही भूल जाओगे

जब कभी भी तन्हाई नोच करके खाएगी
मेरा नाम लिख कर तुम हाथ पर मिटाओगे

दास्ताँ मोहब्बत की एक बार सुन लोगे
मेरा नाम गीतों में तुम भी गुन-गुनाओगे
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Prashant Kumar
दोस्ती से दुश्मनी तक
यानी ख़ूबी से कमी तक

भाव अच्छा चाहता है
जानवर से आदमी तक
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Shubham Rai 'shubh'

Inspirational Raqeeb Shayari on Overcoming Rivalry

इस तरह ज़िंदगी ने दिया है हमारा साथ
जैसे कोई निबाह रहा हो रक़ीब से
Sahir Ludhianvi
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रंग बदला यार ने वो प्यार की बातें गईं
वो मुलाक़ातें गईं वो चाँदनी रातें गईं
Hafeez Jalandhari
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अगर लगता है वो क़ाबिल नहीं है
तो रिश्ता तोड़ना मुश्किल नहीं है

रक़ीब आया है मेरे शे'र सुनने
तो अब ये जंग है महफ़िल नहीं है
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Tanoj Dadhich
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मेरा रकी़ब ही तो मेरा हबीब है अब
मेरे सनम का वह अब चाहत जो हो गया है
RAAHI
इसलिए फोन का नम्बर नहीं बदला मैनें
तुम मुझे कॉल करोगी कि ज़रूरत है अली

एक ही जुमला तो सुनना था मुझे तुमसे मगर
ये भी तुमने न कहा तुमसे मोहब्बत है अली
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ALI ZUHRI