चले जाओ मगर इतनी मदद करते हुए जाओमैं तन्हा मर न जाऊँ दो अदद करते हुए जाओचराग़ों की जलन से ख़त्म हो जाती है तारीक़ीहसद करते हुए आओ हसद करते हुए जाओ— Muzdum Khan