Tiwari Jitendra

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@Tiwarijitendra01

Tiwari Jitendra shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Tiwari Jitendra's shayari and don't forget to save your favorite ones.

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Sher

नहीं काट सकते तुम्हारे बिना दिन बिना बात के क्यूँ जुदाई हुई है — Tiwari Jitendra
मैं किसी पीर को भी नहीं मानता तो ये मोमिन बताते हैं काफ़िर मुझे — Tiwari Jitendra
कभी अम्मा कभी मम्मी कभी माते बुलाता हूँ बड़ा नादान लड़का हूँ सदा उन को सताता हूँ — Tiwari Jitendra
क़तारो में खड़ा होना नहीं आता अना के साथ समझौता नहीं आता — Tiwari Jitendra
काफ़िर बनाया हम ने उस को इस लिए उस की दु'आएँ बद-दु'आएँ बन गई — Tiwari Jitendra
अब पढ़ाई लिखाई से मन भर गया ये रिलेशन समझ यार पाते नहीं — Tiwari Jitendra
ख़ुदा मेरी गुज़ारिश है न सबके साथ ऐसा कर किसी के सर से उस के बाप का साया न छीना कर — Tiwari Jitendra
बदल रहा हूँ ख़ुदा की बनाई क़िस्मत को मिटा रहा हूँ लकीरों को रोज़ हाथों से — Tiwari Jitendra
मर गया हूँ मैं किसी की आशिक़ी में लाश है बस जिस्म मेरी ज़िंदगी में — Tiwari Jitendra
मुझे मेरी तरह का चाहिए दुश्मन अना के साथ समझौता न कर बैठे — Tiwari Jitendra
दुख सभी के हैं हमारी ही तरह अब ख़ुद-कुशी पे कोई आमादा नहीं है — Tiwari Jitendra
जिस्म को नोच कर फेंक देता मगर थी शराफ़त अभी ख़ानदानी बची — Tiwari Jitendra
जला कर ख़त उसे मैं छोड़ आया हूँ कि जैसे दर्द से ग़ाफ़िल नहीं थकता — Tiwari Jitendra

Ghazal

लहू भर के क़लम में मैं वतन को जान लिखता हूँ मुहब्बत नाम आता है तो हिंदुस्तान लिखता हूँ किसी मज़हब से जुड़ता हूँ तो ख़ुद को भूल जाता हूँ हटा उपनाम को अपने मैं बस इंसान लिखता हूँ जलाकर देश के सामान को हक़ माँगते अपना समझते हैं नहीं कुछ भी उन्हें नादान लिखता हूँ नहीं जाता किसी दर पर झुकाता हूँ नहीं मैं सर मुझे धरती बहुत प्यारी इसी का गान लिखता हूँ जवानों के लिए मुझ को अगर लिखना हुआ तो फिर जवानों के इरादों को सदा चट्टान लिखता हूँ 'तिवारी' को ये दुनिया बस अभी इक खेल लगती है किसी जीवन के यापन को कोई मैदान लिखता हूँ — Tiwari Jitendra
तुम कहा फिर हम हुए हैं ख़ैर ये भी ठीक है फ़ासलें तो कम हुए हैं ख़ैर ये भी ठीक है जब तबीबों की दवा भी काम आने से रही ख़त तेरे मरहम हुए हैं ख़ैर ये भी ठीक है वो मुझे जो छोड़ कर जाते रहें आते रहें दूर उन के ग़म हुए हैं ख़ैर ये भी ठीक है बेघरों को हम ने अपना घर दिया दामन दिया अपने सब बरहम हुए हैं ख़ैर ये भी ठीक है यार मिलने में ख़ुदा की कुछ इनायत थी सनम दीप सब मद्धम हुए हैं ख़ैर ये भी ठीक है प्यार पहला है अभी सब कुछ लगेगा खेल है नाम ही सरगम हुए हैं ख़ैर ये भी ठीक है जीत कर बैठे रहे हम दिल किसी का उम्र भर प्रेम के मौसम हुए हैं ख़ैर ये भी ठीक है — Tiwari Jitendra