ज़माना जवानी की तामीर है बस
ग़ज़ल इक मुहब्बत की तहरीर है बस
चलो आज उस को नहीं रोकते हैं
उसे हम मिले हैं ये तक़दीर है बस
जिसे कह रहा है तू नादान बच्चा
क़लम की जगह हाथ शमशीर है बस
कभी मात को जीत में वो बदल दे
पलट दे जो तख़्ता वही वीर है बस
कई सारे दुश्मन अकेला तिवारी
मेरे पास में सिर्फ़ इक तीर है बस
— Tiwari Jitendra















