lahu bhar ke kalam men main watan ko jaan likhta hooñ | लहू भर के क़लम में मैं वतन को जान लिखता हूँ

  - Tiwari Jitendra

लहू भर के क़लम में मैं वतन को जान लिखता हूँ
मुहब्बत नाम आता है तो हिंदुस्तान लिखता हूँ

किसी मज़हब से जुड़ता हूँ तो ख़ुद को भूल जाता हूँ
हटा उपनाम को अपने मैं बस इंसान लिखता हूँ

जलाकर देश के सामान को हक़ माँगते अपना
समझते हैं नहीं कुछ भी उन्हें नादान लिखता हूँ

नहीं जाता किसी दर पर झुकाता हूँ नहीं मैं सर
मुझे धरती बहुत प्यारी इसी का गान लिखता हूँ

जवानों के लिए मुझको अगर लिखना हुआ तो फिर
जवानों के इरादों को सदा चट्टान लिखता हूँ

'तिवारी' को ये दुनिया बस अभी इक खेल लगती है
किसी जीवन के यापन को कोई मैदान लिखता हूँ

  - Tiwari Jitendra

Mohabbat Shayari

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