Nida Fazli

Nida Fazli

@nida-fazli

Mumbai· India

Nida Fazli shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Nida Fazli's shayari and don't forget to save your favorite ones.

Followers

168

Content

182

Likes

2764

Shayari
Audios
  • Sher(43)
  • Ghazal(94)
  • Nazm(45)

Sher

दरिया हो या पहाड़ हो टकराना चाहिए जब तक न साँस टूटे जिए जाना चाहिए — Nida Fazli
धूप तो धूप ही है इस की शिकायत कैसी अब की बरसात में कुछ पेड़ लगाना साहब — Nida Fazli
नक़्शा उठा के कोई नया शहर ढूँढ़िए इस शहर में तो सब से मुलाक़ात हो गई — Nida Fazli
कहाँ चराग़ जलाएँ कहाँ गुलाब रखें छतें तो मिलती हैं लेकिन मकाँ नहीं मिलता — Nida Fazli
वो एक ही चेहरा तो नहीं सारे जहाँ में जो दूर है वो दिल से उतर क्यूँँ नहीं जाता — Nida Fazli
घी मिस्री भी भेज कभी अख़बारों में कई दिनों से चाय है कड़वी या अल्लाह — Nida Fazli
बाग़ में जाने के आदाब हुआ करते हैं किसी तितली को न फूलों से उड़ाया जाए — Nida Fazli
नक़्शा ले कर हाथ में बच्चा है हैरान कैसे दीमक खा गई उस का हिन्दोस्तान — Nida Fazli
नक़्शा उठा के और कोई शहर देखिए इस शहर में तो सब से मुलाक़ात हो गई — Nida Fazli
यहाँ किसी को कोई रास्ता नहीं देता मुझे गिरा के अगर तुम सँभल सको तो चलो — Nida Fazli
ज़िन्दगी का मुक़द्दर सफ़र-दर-सफ़र आख़िरी साँस तक बे-क़रार आदमी — Nida Fazli
नई नई आँखें हों तो हर मंज़र अच्छा लगता है कुछ दिन शहर में घू में लेकिन अब घर अच्छा लगता है — Nida Fazli
जो हो इक बार वो हर बार हो ऐसा नहीं होता हमेशा एक ही से प्यार हो ऐसा नहीं होता — Nida Fazli
सब कुछ तो है क्या ढूँडती रहती हैं निगाहें क्या बात है मैं वक़्त पे घर क्यूँँ नहीं जाता — Nida Fazli
तुम भी लिखना तुम ने उस शब कितनी बार पिया पानी तुम ने भी तो छज्जे ऊपर देखा होगा पूरा चाँद — Nida Fazli
सीधा-साधा डाकिया जादू करे महान एक ही थैले में भरे आँसू और मुस्कान — Nida Fazli
दिल में न हो जुरअत तो मोहब्बत नहीं मिलती ख़ैरात में इतनी बड़ी दौलत नहीं मिलती — Nida Fazli
गिरजा में मंदिरों में अज़ानों में बट गया होते ही सुब्ह आदमी ख़ानों में बट गया — Nida Fazli
दिन सलीक़े से उगा रात ठिकाने से रही दोस्ती अपनी भी कुछ रोज़ ज़माने से रही — Nida Fazli
हर घड़ी ख़ुद से उलझना है मुक़द्दर मेरा मैं ही कश्ती हूँ मुझी में है समुंदर मेरा — Nida Fazli

Ghazal

कोई किसी से ख़ुश हो और वो भी बारहा हो ये बात तो ग़लत है रिश्ता लिबास बन कर मैला नहीं हुआ हो ये बात तो ग़लत है वो चाँद रहगुज़र का साथी जो था सफ़र था मो'जिज़ा नज़र का हर बार की नज़र से रौशन वो मो'जिज़ा हो ये बात तो ग़लत है है बात उस की अच्छी लगती है दिल को सच्ची फिर भी है थोड़ी कच्ची जो उस का हादिसा है मेरा भी तजरबा हो ये बात तो ग़लत है दरिया है बहता पानी हर मौज है रवानी रुकती नहीं कहानी जितना लिखा गया है इतना ही वाक़िआ' हो ये बात तो ग़लत है ये युग है कारोबारी हर शय है इश्तिहारी राजा हो या भिकारी शोहरत है जिस की जितनी इतना ही मर्तबा हो ये बात तो ग़लत है — Nida Fazli
नशा नशे के लिए है अज़ाब में शामिल किसी की याद को कीजे शराब में शामिल हर इक तलाश यहाँ फ़ासलों से रौशन है हक़ीक़तें कहाँ होती हैं ख़्वाब में शामिल वो तुम नहीं हो तो फिर कौन था वो तुम जैसा किसी का ज़िक्र तो था हर किताब में शामिल हमें भी शौक़ है अपनी तरफ़ से जीने का हमारा नाम भी कीजे इ'ताब में शामिल अकेले कमरे में गुल-दान बोलते कब हैं तुम्हारे होंट हैं शायद गुलाब में शामिल ज़मीन रोज़ कहाँ मो'जिज़ा दिखाती है मिरी निगाह भी होगी नक़ाब में शामिल उसी का नाम है नग़्मा उसी का नाम ग़ज़ल वो इक सुकून जो है इज़्तिराब में शामिल — Nida Fazli

Nazm