"सलीक़ा"देवता है कोई हम मेंन फ़रिश्ता कोईछू के मत देखनाहर रंग उतर जाता हैमिलने-जुलने का सलीक़ा है ज़रूरी वर्नाआदमी चंद मुलाक़ातों में मर जाता है— Nida Fazli