dua salaam men lipti zarooratein maange | दुआ सलाम में लिपटी ज़रूरतें माँगे

  - Nida Fazli

दुआ सलाम में लिपटी ज़रूरतें माँगे
क़दम क़दम पे ये बस्ती तिजारतें माँगे

कहाँ हर एक को आती है रास बर्बादी
नए सफ़र की मसाफ़त ज़िहानतें माँगे

चमकते कपड़े महकता ख़ुलूस पुख़्ता मकाँ
हर एक बज़्म में इज़्ज़त हिफ़ाज़तें माँगे

कोई धमाका कोई चीख़ कोई हंगामा
लहू बदन का लहू की शबाहतें माँगे

कोई न हो मिरे तिरे अलावा बस्ती में
कभी कभी यही जज़्बा रिक़ाबतें माँगे

  - Nida Fazli

Dua Shayari

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