koi kisi ki taraf hai koi kisi ki taraf | कोई किसी की तरफ़ है कोई किसी की तरफ़

  - Nida Fazli

कोई किसी की तरफ़ है कोई किसी की तरफ़
कहाँ है शहर में अब कोई ज़िंदगी की तरफ़

सभी की नज़रों में ग़ाएब था जो वो हाज़िर था
किसी ने रुक के नहीं देखा आदमी की तरफ़

तमाम शहर की शमएँ उसी से रौशन थीं
कभी उजाला बहुत था किसी गली की तरफ़

कहीं की भूक हो हर खेत उस का अपना है
कहीं की प्यास हो जाएगी वो नदी की तरफ़

न निकले ख़ैर से अल्लामा क़ौल से बाहर
'यगाना' टूट गए जब चले ख़ुदी की तरफ़

  - Nida Fazli

Anjam Shayari

Our suggestion based on your choice

More by Nida Fazli

As you were reading Shayari by Nida Fazli

Similar Writers

our suggestion based on Nida Fazli

Similar Moods

As you were reading Anjam Shayari Shayari