तेरा सच है तिरे अज़ाबों मेंझूट लिक्खा है सब किताबों मेंएक से मिल के सब से मिल लीजेआज हर शख़्स है नक़ाबों मेंतेरा मिलना तिरा नहीं मिलनाएक रस्ता कई सराबों मेंउन की नाकामियों को भी गिनिएजिन की शोहरत है कामयाबों मेंरौशनी थी सवाल की हद तकहर नज़र खो गई जवाबों में— Nida Fazli