Gunaah Shayari - Words of guilt, sin, regret, and hidden emotions

Gunaah shayari reflects the deep emotions of guilt, regret, and hidden sins that weigh on the heart. It captures the feeling of being a gunahgaar, the pain of mistakes, and the silent burden of past actions. These verses often explore inner conflict, confession, and the consequences of choices made in love and life.

What is gunaah shayari?

Gunaah shayari is poetry that expresses feelings of guilt, sin, regret, and inner conflict. It often reflects emotional pain caused by mistakes or actions one cannot undo.

Gunaah Shayari in Hindi

Express guilt and inner conflict through meaningful Hindi verses.

इक फ़ुर्सत-ए-गुनाह मिली वो भी चार दिन देखे हैं हम ने हौसले परवरदिगार के — Faiz Ahmad Faiz
कोई समझे तो एक बात कहूँ इश्क़ तौफ़ीक़ है गुनाह नहीं — Firaq Gorakhpuri
वैसे तो तुम्हीं ने मुझे बर्बाद किया है इल्ज़ाम किसी और के सर जाए तो अच्छा — Sahir Ludhianvi
ये मय-कदा है यहाँ हैं गुनाह जाम-ब-दस्त वो मदरसा है वो मस्जिद वहाँ मिलेगा सवाब — Ali Sardar Jafri
दिल पे आए हुए इल्ज़ाम से पहचानते हैं लोग अब मुझ को तिरे नाम से पहचानते हैं — Qateel Shifai
मल्लाहों को इल्ज़ाम न दो तुम साहिल वाले क्या जानो ये तूफ़ाँ कौन उठाता है ये कश्ती कौन डुबोता है — Hafeez Jalandhari
यूँँ ज़िंदगी गुज़ार रहा हूँ तिरे बग़ैर जैसे कोई गुनाह किए जा रहा हूँ मैं — Jigar Moradabadi
होंटों पे कभी उन के मिरा नाम ही आए आए तो सही बर-सर-ए-इल्ज़ाम ही आए — Ada Jafarey
इस दौर-ए-मुंसिफ़ी में ज़रूरी नहीं 'वसीम' जिस शख़्स की ख़ता हो उसी को सज़ा मिले — Waseem Barelvi
उम्र-भर के सज्दों से मिल नहीं सकी जन्नत ख़ुल्द से निकलने को इक गुनाह काफ़ी है — Ambreen Haseeb Ambar
आरज़ू' जाम लो झिजक कैसी पी लो और दहशत-ए-गुनाह गई — Arzoo Lakhnavi
झिझकता हूँ उसे इल्ज़ाम देते कोई उम्मीद अब भी रोकती है — Shariq Kaifi

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Gunaah Shayari on Love

Poetry about mistakes and guilt in love and relationships.

दिल में किसी के राह किए जा रहा हूँ मैं कितना हसीं गुनाह किए जा रहा हूँ मैं — Jigar Moradabadi
हसीन लड़की से दिल लगाना भी इक ख़ता है मुझे पता है अगर सज़ा में मिले क़ज़ा तो अलग मज़ा है मुझे पता है — Jatin shukla
मिरे गुनाह की मुझ को सज़ा नहीं देता मिरा ख़ुदा कहीं नाराज़ तो नहीं मुझ से — Shahid Zaki
एक बोसे के तलबगार हैं हम और माँगे तो गुनहगार हैं हम — Unknown
उस के दिल की आग ठंडी पड़ गई मुझ को शोहरत मिल गई इल्ज़ाम से — Siraj Faisal Khan
बस एक लम्हे के सच झूट के एवज़ 'फ़रहत' तमाम उम्र का इल्ज़ाम ले गया मुझ से — Farhat Abbas Shah
ये गूँगों की महफ़िल है निकलना ही पड़ेगा क्या इतनी ख़ता कम है कि हम बोल पड़े हैं — Waseem Barelvi
बेशक तू बे-वफ़ा का सनम नाम दे मुझे बा'द आज़माने के मगर इल्ज़ाम दे मुझे — Ajeetendra Aazi Tamaam

If love has turned bitter, read bewafai shayari for deeper emotions.

Gunaah Shayari on Life

Thoughtful lines reflecting life choices, regrets, and consequences.

जन्नत में आ गया था किसी अप्सरा पे दिल जिस की सज़ा-ए-मौत में दुनिया मिली मुझे — Ankit Maurya
क़सम ख़ुदा की बड़े तजरबे से कहता हूँ गुनाह करने में लज़्ज़त तो है सुकून नहीं — Mehshar Afridi
मत पूछ कि हम ज़ब्त की किस राह से गुज़रे ये देख कि तुझ पर कोई इल्ज़ाम न आया — Mustafa Zaidi
हाँ आप को देखा था मोहब्बत से हमीं ने जी सारे ज़माने के गुनहगार हमीं थे — Ehsan Danish
एक हमें आवारा कहना कोई बड़ा इल्ज़ाम नहीं दुनिया वाले दिल वालों को और बहुत कुछ कहते हैं — Habib Jalib
हम एक रात हुए थे क़रीब और क़रीब फिर उस के बा'द का क़िस्सा गुनाह जैसा है — Aks samastipuri
इश्क़ में वो भी एक वक़्त है जब बे-गुनाही गुनाह है प्यारे — Anand Narayan Mulla

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Gunaah Shayari with Meaning

Understand deeper meanings behind guilt and emotional mistakes.

कौन सा जुर्म ख़ुदा जाने हुआ है साबित मशवरे करता है मुंसिफ़ जो गुनहगार के साथ — Saleem Siddiqui
ख़ुदा के अब्द को तो है मुआ'फ़ी की ताईद हम ऐसे दहरिया जाए कहाँ गुनह ले कर — Haresh Vanza
ग़मों में जी रहे है रिंद सारे खता मत पूछ याँ सागर गिरा है — Nilesh Barai
गुनाह कर के गुनहगार की मैं शफ में तो खड़ा हूँ अब इस सेे ज़्यादा आँख का पानी क्या दिखाऊँ — Aryan Goswami
"तितली" की तो आदत होती है फूल बदलना गुनहगार तो गुलाब है जो याद मैं मुरझा गया — Piyush
तुम्हें हक है की सज़ा-ए-मौत दो हमें हमारा हक है की पहले गुनाह साबित हो — Praveen Bhardwaj
अस्ल क़ातिल तो सामने है मगर तुम को इल्ज़ाम मुझ पे धरना है — Amaan Pathan
आईने के दोनों तरफ़ मुजरिम खड़ा है और लोग हैं कि आईने को गुनहगार बताते हैं — Murli Dhakad
एक खिड़की है, एक गली है, एक पता है सौ बार गुजर के भी भुल जाना मेरी खता है — Animesh Choubey
सब एक खता पर मुझ को कहने लगे क्या क्या मैं ने तो ये समझा था सब मुझ को समझते हैं — Prashant Sitapuri

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Gunaah Shayari on Emotions

Verses that capture inner turmoil, shame, and silent pain.

गुनाह-ए-इश्क़ ने सिखला दिया है ये हुनर भी देख जनाज़ा भी मेरा ही और कांधा भी है ख़ुद का ही — A R Sahil "Aleeg"
गुनहगार तो पहुंच से बहुत दूर थे सज़ा उन्हें मिली जो बेकुसूर थे — Anurag Ravi
फिर से इस इश्क़ की ख़ता अब कौन करे भर चुके ज़ख़्म जो, हरा अब कौन करे — A R Sahil "Aleeg"
है विचारों से पाप का भागी मात्र धारण है वस्त्र साधू का — Tarique Jamal

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2 Line Gunaah Shayari

Short and impactful two-line shayari expressing guilt and regret.

हम करेंगे गुनाह दोबारा लुत्फ़ आया अगर नदामत में — Vijay Anand Mahir
न कोई शिकवा शिकायत, न रोना-धोना, न कोशिश करूँँगा मैं रोकने की फ़क़त इतना कह दो, इस बेवफ़ाई की क्या वजह है? ख़ता आख़िर क्या है मेरी — A R Sahil "Aleeg"
जहाँ के इल्ज़ाम का क्या बुरा मानूँ लगाए इल्ज़ाम अपनों ने भी मुझ पर — A R Sahil "Aleeg"
शा'इरी में पनाह लेता हूँ अपने सर ये गुनाह लेता हूँ — Saarthi Baidyanath
कभी ग़फ़लत में या वहशत में, दिल तोड़ा हो किसी का ख़ता मुझ सेे ये, हुआ ही नहीं है सरज़द अभी तक — A R Sahil "Aleeg"
इश्क़ और भूक, क्या बताएँ हर गुनाह का सबब यही दो — A R Sahil "Aleeg"
तुम्हारे इल्ज़ाम का क्या बुरा मानूँ बहन छोटी और फिर लाडली भी हो — A R Sahil "Aleeg"
अपने शहर से भागता फिर रहा हूँ मुझ पे मेरे क़त्ल का इल्ज़ाम है — Faisal Yaseen
अपने दामन को गुनाह से मैं बचा लूँगा फिर ख़ुदा को रो-रो के इक दिन मना लूँगा — Sayeed Khan
हर गुनह को इक सज़ा है उस का हक़ दोस्त बे-वफ़ा मरता नहीं, कितना ग़लत है — BR SUDHAKAR
करेंगे हर पल वफ़ा तुम से इंशा-अल्लाह जाँनाँ जफ़ा कर बैठूँ तो इल्ज़ाम रब की मर्ज़ी पे होगा — A R Sahil "Aleeg"

Short Gunaah Shayari

Quick verses for expressing deep feelings in few words.

कर्ण बनकर दोस्ती में कर रहे हैं पाप लेकिन हम युधिष्ठिर तो नहीं जो द्रौपदी पर दाँव खेलें — Gaurav Singh
अब कभी पूछ ले यार, मेरा गुनाह क्या इस क़दर उल्फ़तों का सज़ा दे गया मुझे — Raunak Karn
मुझे वो प्यार कर लेती तो उस को पाप लग जाता हजारों साल की वो मान्यताएँ टूट जाती तो — Umesh Maurya
हो ख़ताकार तुम मोहब्बत की अब सज़ा-ए-फ़िराक़ वाजिब है — Shajar Abbas
इस जानिब से देखोगे तो पाक नज़र आएगा उस जानिब से देखोगे तो पाप नज़र आएगा — Afzal Sultanpuri
पाप करने का नहीं अब डर रहा घाट पे गंगा के सब धुल जाएँगे — Umesh Maurya
गर इश्क़ नहीं होता बदनाम नहीं होता तुझ पे मिरी जांँ कोई इल्ज़ाम नहीं होता — shaan manral
वो जो इल्ज़ाम हम पर ही लगा के फिर ख़फ़ा हैं अब हमें कह बद-चलन ख़ुद ही हुए वो बे-वफ़ा हैं अब — Shivam Mishra

Gunaah Shayari for Status

Perfect lines for WhatsApp and social media status updates.

गर बिछड़ना है बिछड़ जाओ सनम पर न हम को इस तरह इल्ज़ाम दो — Ajeetendra Aazi Tamaam
एक ख़ता तुम ने की एक ख़ता मैं ने की फिर ये झगड़ा कैसा हाथ मिलाओ साहिब — Meem Alif Shaz
जिन आँखों में छोटे मोटे सपने हैं उन आँखों में आलस आना पाप समझ — Sanskar Shrivastav
मौत से बच न पाएँगे हरगिज़ बच सकें तो गुनाह से बचिए — Shakir Dehlvi
तक़दीर मेरी मुझ सेे बग़ावत यूँँ कर गई जैसे गुलों पे ख़ुशबू ही इल्ज़ाम धर गई — Navneet krishna
तक़दीर मेरी मुझ सेे बग़ावत यूँँ कर गई जैसे गुलों पे ख़ुशबू ही इल्ज़ाम धर गई — Navneet krishna
लगाता फिर रहा है मुझ पे जो इल्ज़ाम तो ये सुन यहीं आ कर मिटाएगा मेरे इल्ज़ाम तू सारे — Piyush Mishra 'Aab'

Gunaah Captions

Express your hidden emotions and guilt through captions.

हम को भी ख़ता करने का इन'आम मिला है इक झूठ से बचने का भी इल्ज़ाम मिला है — Meem Alif Shaz
हो गया बे-गुनाह मैं साबित फिर भी हाकिम का दिल नहीं पिघला — Sohil Barelvi
शहर में गुनाह घर बनाता ही नहीं अगर काटने लगे सज़ा बशर जो संविधान से — 100rav
ये नागिन सी तेरी ज़ुल्फ़ें घटा बनकर जो छाएंगी तड़प कर मर भी जाऊँ तो नहीं इल्ज़ाम लिक्खूँगा — Mamta 'Anchahi'
लगाता अब वही इल्ज़ाम हम पर लुटाता था कभी जो शाम हम पर — Murari Mandal
बेबसी भी गुनाह है साहब हाल अपना तबाह है साहब — Sabir Pathan
जंग आलूदा था हर इल्ज़ाम तेरा तू मुझे कैसे हराता मेरे भाई — Meem Alif Shaz
जिस तरफ़ उस की निगाहें मुड़ गई इक दफ़ा जैसे सज़ा-ए-मौत हो — Umesh Maurya

FAQs

Yes, gunaah shayari is often used as WhatsApp status to express regret, hidden emotions, or personal guilt in a subtle and poetic way.
It conveys emotions like regret, shame, pain, confession, and the burden of past mistakes, often mixed with love or heartbreak.
Not always. While it centers around the idea of sin or guilt, it can also reflect emotional mistakes in relationships, love, and life decisions.
Dard shayari focuses on pain and suffering, while gunaah shayari specifically highlights guilt, mistakes, and the feeling of being responsible for that pain.
Yes, it works well for Instagram captions, especially when expressing deep thoughts, regrets, or emotional struggles in a meaningful way.
Yes, gunaah shayari is available in both Hindi and English, often with Urdu words to add depth and poetic richness.