Swapnil Tiwari

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@swapnil-tiwari

Swapnil Tiwari shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Swapnil Tiwari's shayari and don't forget to save your favorite ones.

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Sher

मज़ाक सहना नहीं है हँसी नहीं करनी उदास रहने में कोई कमी नहीं करनी — Swapnil Tiwari
अब इक बीमार लाओ तो बचें हम मसीहाई है बीमारी हमारी — Swapnil Tiwari
और कम याद आओगी अगले बरस तुम अब के कम याद आई हो पिछले बरस से — Swapnil Tiwari
रोना नहीं मुझे मुझे रहने दे बस उदास तू बैठ मेरे पास मगर यूँँ लिपट नहीं — Swapnil Tiwari
हर एक नींद को परख रहा हूँ मैं तुम्हारे​ एक ख़्वाब का जला हुआ — Swapnil Tiwari
ये ज़िंदगी जो पुकारे तो शक सा होता है कहीं अभी तो मुझे ख़ुद-कुशी नहीं करनी — Swapnil Tiwari
गली में बैठे हैं उस की नज़र जमाए हुए हमारे बस में फ़क़त इंतिज़ार करना है — Swapnil Tiwari
नाम आया है तेरा जब से गुनहगारों में सब गवाह अपनी गवाही से मुकरना चाहें — Swapnil Tiwari
इश्क़ की इक रंगीन सदा पर बरसे रंग रंग हो मजनूँ और लैला पर बरसे रंग — Swapnil Tiwari
अक्सर साँसें रोक के सुनता रहता हूँ उस के लम्स बदन पर धड़का करते हैं — Swapnil Tiwari
पहले पानी को और हवा को बचाओ ये बचा लो तो फिर ख़ुदा को बचाओ — Swapnil Tiwari
जलते दिए सा इक बोसा रख कर उस ने चमक बढ़ा दी है मेरी पेशानी की — Swapnil Tiwari
अपना हर तिनका समेटे किस जगह पर जा छुपे हम तिरी आवाज़ की चिड़ियों से घबराते हुए — Swapnil Tiwari
अरे मैं इंतिक़ामन रो रहा हूँ मैं चुप हो जाऊँगा उस को रुला के — Swapnil Tiwari
तुम्हारा ख़्वाब भी आए तो नींद पूरी हो मैं सो तो जाऊँगा नींद आने की दवा ले कर — Swapnil Tiwari
वो जो पागल था अब वो कैसा है ऐसे वो पूछता है हाल मेरा — Swapnil Tiwari
मेरी बातें न काट पाए तो वो मेरे होंठ काट खाती है — Swapnil Tiwari

Ghazal

समाअतों में बहुत दूर की सदा ले कर भटक रहा हूँ मैं इक ख़्वाब का पता ले कर तुम्हारी याद बरस जाए तो थकन कम हो कहाँ कहाँ मैं फिरूँ सर पे अब घटा ले कर तमाम हिज्र के मारों सा शब के दरिया में मैं डूब जाऊँ वही चाँद का घड़ा ले कर तुम्हारा ख़्वाब भी आए तो नींद पूरी हो मैं सो तो जाऊँगा नींद आने की दवा ले कर मैं ख़ुद से दूर निकलता गया उधड़ता हुआ ख़ुद अपनी ज़ात से निकला हुआ सिरा ले कर तमाम शहर की तामीर धूप ने की है मिलेगी छाँव भी उस का ही आसरा ले कर बचा है मुझ में बस इक आख़िरी शरर 'आतिश' कोई तो आए तिरी याद की हवा ले कर — Swapnil Tiwari
मेरे होंटों को छुआ चाहती है ख़ामुशी! तू भी ये क्या चाहती है मेरे कमरे में नहीं है जो कहीं अब वो खिड़की भी खुला चाहती है ज़िंदगी! गर न उधेड़ेगी मुझे किस लिए मेरा सिरा चाहती है सारे हंगामे हैं पर्दे पर अब फ़िल्म भी ख़त्म हुआ चाहती है कब से बैठी है उदासी पे मेरी याद की तितली उड़ा चाहती है नूर मिट्टी में ही होगा उन की जिन चराग़ों को हवा चाहती है मेरे अंदर है उमस इस दर्जा मुझ में बारिश सी हुआ चाहती है भोर आई है इरेज़र की तरह शब की तहरीर मिटा चाहती है आसमाँ में हैं सराबों की सी जिन घटाओं को हवा चाहती है चाँद का फूल है खिलने को फिर शाम अब शब को छुआ चाहती है फिर न लौटेगी मिरी आँखों में नींद रंगों सी उड़ा चाहती है — Swapnil Tiwari
दिल ज़बाँ ज़ेहन मिरे आज सँवरना चाहें सब के सब सिर्फ़ तिरी बात ही करना चाहें दाग़ हैं हम तिरे दामन के सो ज़िद्दी भी हैं हम कोई रंग नहीं हैं कि उतरना चाहें आरज़ू है हमें सहरा की सो हैं भी सैराब ख़ुश्क हो जाएँ हम इक पल में जो झरना चाहें ये बदन है तिरा ये आम सा रस्ता तो नहीं इस के हर मोड़ पे हम सदियों ठहरना चाहें ये सहर है तो भला चाहिए किस को ये कि हम शब की दीवार से सर फोड़ के मरना चाहें जैसे सोए हुए पानी में उतरता है साँप हम भी चुप-चाप तिरे दिल में उतरना चाहें आम से शख़्स के लगते हैं यूँँ तो तेरे पाँव सारे दरिया ही जिन्हें छू के गुज़रना चाहें चाहते हैं कि कभी ज़िक्र हमारा वो करें हम भी बहते हुए पानी पे ठहरना चाहें नाम आया है तिरा जब से गुनहगारों में सब गवाह अपनी गवाही से मुकरना चाहें वस्ल और हिज्र के दरिया में वही उतरें जो इस तरफ़ डूब के उस ओर उभरना चाहें कोई आएगा नहीं टुकड़े हमारे चुनने हम इसी जिस्म के अंदर ही बिखरना चाहें — Swapnil Tiwari
धीरे धीरे ढलते सूरज का सफ़र मेरा भी है शाम बतलाती है मुझ को एक घर मेरा भी है जिस नदी का तू किनारा है उसी का मैं भी हूँ तेरे हिस्से में जो है वो ही भँवर मेरा भी है एक पगडंडी चली जंगल में बस ये सोच कर दश्त के उस पार शायद एक घर मेरा भी है फूटते ही एक अंकुर ने दरख़्तों से कहा आसमाँ इक चाहिए मुझ को कि सर मेरा भी है आज बेदारी मुझे शब भर ये समझाती रही इक ज़रा सा हक़ तुम्हारे ख़्वाबों पर मेरा भी है मेरे अश्कों में छुपी थी स्वाती की इक बूँद भी इस समुंदर में कहीं पर इक गुहर मेरा भी है शाख़ पर शब की लगे इस चाँद में है धूप जो वो मिरी आँखों की है सो वो समर मेरा भी है तू जहाँ पर ख़ाक उड़ाने जा रहा है ऐ जुनूँ हाँ उन्हीं वीरानियों में इक खंडर मेरा भी है जान जाते हैं पता 'आतिश' धुएँ से सब मिरा सोचता रहता हूँ क्या कोई मफ़र मेरा भी है — Swapnil Tiwari
सूने सूने से फ़लक पर इक घटा बनती हुई धीरे धीरे उस की आमद की फ़ज़ा बनती हुई जन्म का बस एक लम्हा और अब ये ज़िंदगी इक ज़रा सी बात बढ़ कर मसअला बनती हुई क़ैद सी लगने लगी है मुझ को ये आवारगी अब तो आज़ादी भी मेरी इक सज़ा बनती हुई तेरी दी हर चोट इक लज़्ज़त सी है मेरे लिए अब ये लज़्ज़त दाइमी सा ज़ाइक़ा बनती हुई कर गई है किस क़दर मसरूफ़ मुझ को देखिए मेरी सुब्ह-ओ-शाम का वो मश्ग़ला बनती हुई हैं सभी टूटे हुए ये जान पाया जब दुखी मेरी इक टूटी सदा सब की सदा बनती हुई ऐ मिरे साए मिला है जब से तुझ सा हम-सफ़र रास्ते की हर मुसीबत रास्ता बनती हुई थम चुकी थी जब कि हर हलचल तिरी याद आई फिर ज़िंदगी की सतह पर इक बुलबुला बनती हुई मेरी आँखें हैं अभी भी इस तिलिस्मी क़ैद में इस की वो धुँदली सी सूरत जा-ब-जा बनती हुई इस जलन के साथ ही रहना है अब 'आतिश' मुझे जो मिरी ज़िद थी कभी अब वो अना बनती हुई — Swapnil Tiwari

Nazm

कॉफ़ी कप रीडिंग उसे मैसेज तो भेजा है के कॉफ़ी पर मिलो मुझ से वो आ जाएगी तो अच्छा मैं पहले सिर्फ़ दो कॉफ़ी मँगाऊंगा मैं कैपेचीनो पीता हूँ वो कैसी कॉफ़ी पीती है इस का अंदाज़ा तो उस के आने पर होगा… हमारे पास तो बातें भी कम हैं सो कॉफ़ी जल्द पी लेंगे। जो उस के कप में थोडा झाग कॉफ़ी का बचा होगा मैं उस की शेप को पढ़ कर उसे फ्यूचर बताउँगा बताऊँगा उसे मैं कैसे वो मुझ जैसे इक लड़के की दुनिया को बदल देगी… (उसे मालूम होगा क्या? के कॉफ़ी कप की रीडिंग का तरीक़ा ये नहीं होता ?) मैं कैफ़े आ चुका हूँ... ...वो भी रस्ते में कहीं होगी बहुत से लोग कैफ़े आ के पढ़ते लिखते रहते हैं मुहम्मद अल्वी की नज़्में तो मैं भी साथ लाया हूँ ये होगा तो नहीं फिर भी, वो आई ही नहीं तो फिर इन्हीं लोगों के जैसे मैं भी पढ़ कर वक़्त काटूँगा। उसे आने में देरी हो रही है मैं इक कॉफ़ी तो तन्हा पी चुका हूँ ज़रा सा झाग कप में है जिसे देखो तो लगता है के इक लड़का अकेला बैठ कर कुछ पढ़ रहा है। तसल्ली दे रहा हूँ अब मैं ख़ुद को ये मेरी शाम का फ्यूचर नहीं है ... के कॉफ़ी कप की रीडिंग का तरीक़ा ये नहीं होता… — Swapnil Tiwari