ye dhoop giri hai jo mire lawn men aa kar | ये धूप गिरी है जो मिरे लॉन में आ कर

  - Swapnil Tiwari

ये धूप गिरी है जो मिरे लॉन में आ कर
ले जाएगी जल्दी ही इसे शाम उठा कर

सीने में छुपा शाम की आँखों से बचा कर
इक लहर को हम लाए समुंदर से उठा कर

हाँ वक़्त से पहले ही उड़ा देगी इसे सुब्ह
रक्खी न गई चाँद से गर शब ये दबा कर

इक सुब्ह भली सी मिरे नज़दीक से गुज़री
मैं बैठा रहा हिज्र की इक रात बिछा कर

फिर सुब्ह से ही आज अलम देख रहे हैं
यादों की कोई फ़िल्म मिरे दिल में चला कर

फिर चाय में बिस्कुट की तरह भूकी सी ये शाम
खा जाएगी सूरज को समुंदर में डुबा कर

  - Swapnil Tiwari

Raksha bandhan Shayari

Our suggestion based on your choice

More by Swapnil Tiwari

As you were reading Shayari by Swapnil Tiwari

Similar Writers

our suggestion based on Swapnil Tiwari

Similar Moods

As you were reading Raksha bandhan Shayari Shayari