'ishq ki ik rangeen sadaa par barase rang | 'इश्क़ की इक रंगीन सदा पर बरसे रंग

  - Swapnil Tiwari

'इश्क़ की इक रंगीन सदा पर बरसे रंग
रंग हो मजनूँ और लैला पर बरसे रंग

कब तक चुनरी पर ही ज़ुल्म हों रंगों के
रंगरेज़ा तेरी भी क़बा पर बरसे रंग

ख़्वाब भरें तिरी आँखें मेरी आँखों में
एक घटा से एक घटा पर बरसे रंग

इक सतरंगी ख़ुश्बू ओढ़ के निकले तू
इस बे-रंग उदास हवा पर बरसे रंग

ऐ देवी रुख़्सार पे तेरे रंग लगे
जोगी की अलमस्त जटा पर बरसे रंग

मेरे अनासिर ख़ाक न हों बस रंग बनें
और जंगल सहरा दरिया पर बरसे रंग

सूरज अपने पर झटके और सुब्ह उड़े
नींद नहाई इस दुनिया पर बरसे रंग

  - Swapnil Tiwari

Inquilab Shayari

Our suggestion based on your choice

More by Swapnil Tiwari

As you were reading Shayari by Swapnil Tiwari

Similar Writers

our suggestion based on Swapnil Tiwari

Similar Moods

As you were reading Inquilab Shayari Shayari