Krishnakant Kabk

Krishnakant Kabk

@krishnakantkabk

Krishnakant Kabk shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Krishnakant Kabk's shayari and don't forget to save your favorite ones.

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Sher

सब को ही है तकलीफ़ किसी ना किसी से तो तकलीफ़ को बिल्कुल नहीं तकलीफ़ किसी से — Krishnakant Kabk
जितनी दफ़ा उसे मेरी याद आती होगी उतनी दफ़ा ग़ज़ल मेरी गुनगुनाती होगी — Krishnakant Kabk
कैसे हम को अलग करोगे हम इक दूजे के मानी हैं — Krishnakant Kabk
मशीनेें दुनिया-भर की भी लगा दो चाहे तुम उस के दिल का रस्ता नईं बना पाओगे — Krishnakant Kabk
उसे इतना क़रीबी क्यूँँ बनाया 'कब्क' गया इक शख़्स तो महफ़िल गई जैसे — Krishnakant Kabk
मौसम यही है प्यार का सावन अभी आया नहीं — Krishnakant Kabk
तुम्हारे साथ मुझ को चाय पीना है मगर ये भी है शर्त कप सिर्फ़ एक होना चाहिए — Krishnakant Kabk
हाँ ये बहुत पाबन्दियों में बाँध कर रखती हमें फिर भी ग़ज़ल के जितनी अच्छी कोई महबूबा नहीं — Krishnakant Kabk
शा'इरी का फ़न तुम भी सीख लो ज़रा हम सेे बस गिटार पर ही लड़की फ़िदा नहीं होती — Krishnakant Kabk
भूलने भुलाने के क़िस्से क्या बताएँ हम मतला भूल जाते हैं शे'र याद रहते हैं — Krishnakant Kabk
रंग जब बनकर गवाह आया तेरी तासीर का मैं ने ये आलम भी देखा है तेरी तस्वीर का — Krishnakant Kabk
मैं कहूँ भी तो कैसे कहूँ अब ग़ज़ल शे'र भी मेरे तन्हा हैं मेरी तरह — Krishnakant Kabk
ज़रा सा हाथ लगने से हो जाते ज़ख़्म सारे ठीक तेरे हाथों में जादू है तू चारासाज़ थोड़ी है — Krishnakant Kabk
आँख में इक अजब सी नमी रह गई तू न था तो लगा कुछ कमी रह गई — Krishnakant Kabk
वो तैरना सीखा नहीं जो इक दफ़ा डूबा नहीं — Krishnakant Kabk
वो रस्मन पूछ लेती है कि मिलना या नहीं मिलना फिर इस के बा'द तो मिलना किसे अच्छा नहीं लगता — Krishnakant Kabk

Ghazal