Krishnakant Kabk

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Krishnakant Kabk shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Krishnakant Kabk's shayari and don't forget to save your favorite ones.

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  • Sher
  • Ghazal

न रूई हो तो अपने अश्कों से बाती बनाएँगे
बुझा दीया हमारा तो हवा से लड़ भी जाएँगे

बनाई रोज़ चौदह साल रंगोली बस इस ख़ातिर
न जाने रामजी वनवास से कब लौट आएंँगे

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तुम्हारे साथ मुझको चाय पीना है मगर
ये भी है शर्त कप सिर्फ़ एक होना चाहिए

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सबको ही है तकलीफ़ किसी ना किसी से तो
तकलीफ़ को बिलकुल नहीं तकलीफ़ किसी से

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हाँ ये बहुत पाबन्दियों में बाँध कर रखती हमें
फिर भी ग़ज़ल के जितनी अच्छी कोई महबूबा नहीं

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जितनी दफ़ा उसे मेरी याद आती होगी
उतनी दफ़ा ग़ज़ल मेरी गुनगुनाती होगी

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शायरी का फ़न तुम भी सीख लो ज़रा हमसे
बस गिटार पर ही लड़की फ़िदा नहीं होती

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मेरे हाथों से तेरा हाथ इक पल छूट जाता है
मुझे अक्सर डरा कर के ये सपना टूट जाता है

यहाँ माँझा लिपटने में लगे रहते सभी अपना
कोई चुपके से आ कर के पतंगे लूट जाता है

Krishnakant Kabk

भूलने भुलाने के किस्से क्या बताएँ हम
मतला भूल जाते हैं शेर याद रहते हैं

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कैसे हमको अलग करोगे
हम इक दूजे के मानी हैं

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रंग जब बनकर गवाह आया तेरी तासीर का
मैंने ये आलम भी देखा है तेरी तस्वीर का

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बातों बातों में तेरी जब बात आने लगती है
फिर बिना मौसम के ही बरसात आने लगती है

ख़ूबसूरत होती थी हर शाम तेरे साथ में
दोपहर के बाद अब तो रात आने लगती है

Krishnakant Kabk

मैं कहूँ भी तो कैसे कहूँ अब ग़ज़ल
शेर भी मेरे तन्हा हैं मेरी तरह

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मशीनेें दुनिया-भर की भी लगा दो चाहे
तुम उसके दिल का रस्ता नईं बना पाओगे

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ज़रा सा हाथ लगने से हो जाते ज़ख़्म सारे ठीक
तेरे हाथों में जादू है तू चारासाज़ थोड़ी है

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उसे इतना क़रीबी क्यूँ बनाया 'कब्क'
गया इक शख़्स तो महफ़िल गई जैसे

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आँख में इक अजब सी नमी रह गई
तू न था तो लगा कुछ कमी रह गई

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मौसम यही है प्यार का
सावन अभी आया नहीं

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वो तैरना सीखा नहीं
जो इक दफ़ा डूबा नहीं

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मोहब्बत से मोहब्बत मिल गई जैसे
कि सहरा में कली इक खिल गई जैसे

न जाने कैसे तुम बिन जी रहा था मैं
समझ लो हर घड़ी मुश्किल गई जैसे

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वो रस्मन पूछ लेती है कि मिलना या नहीं मिलना
फिर इसके बाद तो मिलना किसे अच्छा नहीं लगता

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