@krishnakantkabk
Krishnakant Kabk shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Krishnakant Kabk's shayari and don't forget to save your favorite ones.
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न रूई हो तो अपने अश्कों से बाती बनाएँगे
बुझा दीया हमारा तो हवा से लड़ भी जाएँगे
बनाई रोज़ चौदह साल रंगोली बस इस ख़ातिर
न जाने रामजी वनवास से कब लौट आएंँगे
हाँ ये बहुत पाबन्दियों में बाँध कर रखती हमें
फिर भी ग़ज़ल के जितनी अच्छी कोई महबूबा नहीं
मेरे हाथों से तेरा हाथ इक पल छूट जाता है
मुझे अक्सर डरा कर के ये सपना टूट जाता है
यहाँ माँझा लिपटने में लगे रहते सभी अपना
कोई चुपके से आ कर के पतंगे लूट जाता है
बातों बातों में तेरी जब बात आने लगती है
फिर बिना मौसम के ही बरसात आने लगती है
ख़ूबसूरत होती थी हर शाम तेरे साथ में
दोपहर के बाद अब तो रात आने लगती है
ज़रा सा हाथ लगने से हो जाते ज़ख़्म सारे ठीक
तेरे हाथों में जादू है तू चारासाज़ थोड़ी है
मोहब्बत से मोहब्बत मिल गई जैसे
कि सहरा में कली इक खिल गई जैसे
न जाने कैसे तुम बिन जी रहा था मैं
समझ लो हर घड़ी मुश्किल गई जैसे
वो रस्मन पूछ लेती है कि मिलना या नहीं मिलना
फिर इसके बाद तो मिलना किसे अच्छा नहीं लगता