Adil Mansuri

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@adil-mansuri

Adil Mansuri shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Adil Mansuri's shayari and don't forget to save your favorite ones.

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  • Sher
  • Ghazal
तस्वीर में जो क़ैद था वो शख़्स रात को
ख़ुद ही फ़्रेम तोड़ के पहलू में आ गया
Adil Mansuri
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ख़्वाहिश सुखाने रक्खी थी कोठे पे दोपहर
अब शाम हो चली मियाँ देखो किधर गई
Adil Mansuri
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तुम को दावा है सुख़न-फ़हमी का
जाओ 'ग़ालिब' के तरफ़-दार बनो
Adil Mansuri
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दरिया की वुसअतों से उसे नापते नहीं
तन्हाई कितनी गहरी है इक जाम भर के देख
Adil Mansuri
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हम को गाली के लिए भी लब हिला सकते नहीं
ग़ैर को बोसा दिया तो मुँह से दिखला कर दिया
Adil Mansuri
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खिड़की ने आँखें खोली
दरवाज़े का दिल धड़का
Adil Mansuri
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नींद भी जागती रही पूरे हुए न ख़्वाब भी
सुब्ह हुई ज़मीन पर रात ढली मज़ार में
Adil Mansuri
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दरवाज़ा खटखटा के सितारे चले गए
ख़्वाबों की शाल ओढ़ के मैं ऊँघता रहा
Adil Mansuri
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ख़ुद-ब-ख़ुद शाख़ लचक जाएगी
फल से भरपूर तो हो लेने दो
Adil Mansuri
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कब तक पड़े रहोगे हवाओं के हाथ में
कब तक चलेगा खोखले शब्दों का कारोबार
Adil Mansuri
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मुझे पसंद नहीं ऐसे कारोबार में हूँ
ये जब्र है कि मैं ख़ुद अपने इख़्तियार में हूँ
Adil Mansuri
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दरिया के किनारे पे मिरी लाश पड़ी थी
और पानी की तह में वो मुझे ढूँड रहा था
Adil Mansuri
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फिर बालों में रात हुई
फिर हाथों में चाँद खिला
Adil Mansuri
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फूलों की सेज पर ज़रा आराम क्या किया
उस गुल-बदन पे नक़्श उठ आए गुलाब के
Adil Mansuri
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तू किस के कमरे में थी
मैं तेरे कमरे में था
Adil Mansuri
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जो चुप-चाप रहती थी दीवार पर
वो तस्वीर बातें बनाने लगी
Adil Mansuri
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क्यूँ चलते चलते रुक गए वीरान रास्तो
तन्हा हूँ आज मैं ज़रा घर तक तो साथ दो
Adil Mansuri
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ऐसे डरे हुए हैं ज़माने की चाल से
घर में भी पाँव रखते हैं हम तो सँभाल कर
Adil Mansuri
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कोई ख़ुद-कुशी की तरफ़ चल दिया
उदासी की मेहनत ठिकाने लगी
Adil Mansuri
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ज़रा देर बैठे थे तन्हाई में
तिरी याद आँखें दुखाने लगी
Adil Mansuri
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