jo chup-chaap rahti thi deewaar par | जो चुप-चाप रहती थी दीवार पर

  - Adil Mansuri

जो चुप-चाप रहती थी दीवार पर
वो तस्वीर बातें बनाने लगी

  - Adil Mansuri

DP Shayari

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    shaan manral

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    गाँठी है उस ने दोस्ती इक पेश-इमाम से
    'आदिल' उठा लो हाथ दुआ-ओ-सलाम से

    पानी ने रास्ता न दिया जान-बूझ कर
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    नश्शा सा डोलता है तिरे अंग अंग पर
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    Adil Mansuri
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    Adil Mansuri
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    तू किस के कमरे में थी
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    Adil Mansuri
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    मैं हाथ में तलवार लिए झूम रहा था

    घूँघट में मिरे ख़्वाब की ताबीर छुपी थी
    मेहंदी से हथेली में मिरा नाम लिखा था

    लब थे कि किसी प्याली के होंटों पे झुके थे
    और हाथ कहीं गर्दन-ए-मीना में पड़ा था

    हम्माम के आईने में शब डूब रही थी
    सिगरेट से नए दिन का धुआँ फैल रहा था

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    मालूम नहीं फिर वो कहाँ छुप गया 'आदिल'
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    Adil Mansuri
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    Adil Mansuri
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