sama'aton men bahut door ki sadaa le kar | समाअतों में बहुत दूर की सदा ले कर

  - Swapnil Tiwari

समाअतों में बहुत दूर की सदा ले कर
भटक रहा हूँ मैं इक ख़्वाब का पता ले कर

तुम्हारी याद बरस जाए तो थकन कम हो
कहाँ कहाँ मैं फिरूँ सर पे अब घटा ले कर

तमाम हिज्र के मारों सा शब के दरिया में
मैं डूब जाऊँ वही चाँद का घड़ा ले कर

तुम्हारा ख़्वाब भी आए तो नींद पूरी हो
मैं सो तो जाऊँगा नींद आने की दवा ले कर

मैं ख़ुद से दूर निकलता गया उधड़ता हुआ
ख़ुद अपनी ज़ात से निकला हुआ सिरा ले कर

तमाम शहर की तामीर धूप ने की है
मिलेगी छाँव भी उस का ही आसरा ले कर

बचा है मुझ में बस इक आख़िरी शरर 'आतिश'
कोई तो आए तिरी याद की हवा ले कर

  - Swapnil Tiwari

Samundar Shayari

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