
मिलेगी क़ैद से कैसे रिहाई कौन सोचेगा
यहाँ तेरे सिवा तेरी भलाई कौन सोचेगा
ज़माने भर का तू सोचेगा तो फिर तेरे बारे में
मुझे तू ही बता दे मेरे भाई, कौन सोचेगा?
— Siddharth Saaz
Other sher from the same pen
Shers of gunaah.
Voices in the same orbit
Poetry by feeling