
मसाइल तो बहुत से हैं मगर बस एक ही हल है
सहरस शाम तक सर मेरा है बेगम की चप्पल है
मेरे मालिक भला इस से बुरी भी क्या सज़ा होगी
मेरा शादीशुदा होना ही दोज़ख़ की रिहर्सल है
— Paplu Lucknawi
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