Mazhar Imam

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Mazhar Imam shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Mazhar Imam's shayari and don't forget to save your favorite ones.

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Sher

दोस्तों से मुलाक़ात की शाम है ये सज़ा काट कर अपने घर जाऊँगा — Mazhar Imam
वो मेरा जब न हो सका तो फिर यही सज़ा रहे किसी को प्यार जब करूँँ वो छुप के देखता रहे — Mazhar Imam
एक मैं ने ही उगाए नहीं ख़्वाबों के गुलाब तू भी इस जुर्म में शामिल है मेरा साथ न छोड़ — Mazhar Imam

Ghazal

ज़िंदगी काविश-ए-बातिल है मेरा साथ न छोड़ तू ही इक उम्र का हासिल है मेरा साथ न छोड़ लोग मिलते हैं सर-ए-राह गुज़र जाते हैं तू ही इक हम-सफ़र-ए-दिल है मेरा साथ न छोड़ तू ने सोचा है मुझे तू ने सँवारा है मुझे तू मेरा ज़ेहन मिरा दिल है मेरा साथ न छोड़ तू न होगा तो कहाँ जा के जलूँगा शब भर तुझ से ही गर्मी-ए-महफ़िल है मेरा साथ न छोड़ मैं कि बिफरे हुए तूफ़ाँ में हूँ लहरों लहरों तू कि आसूदा-ए-साहिल है मेरा साथ न छोड़ इस रिफ़ाक़त को सिपर अपनी बना लें जी लें शहर का शहर ही क़ातिल है मेरा साथ न छोड़ एक मैं ने ही उगाए नहीं ख़्वाबों के गुलाब तू भी इस जुर्म में शामिल है मेरा साथ न छोड़ अब किसी राह पे जलते नहीं चाहत के चराग़ तू मिरी आख़िरी मंज़िल है मेरा साथ न छोड़ — Mazhar Imam
अपने खोए हुए लम्हात को पाया था कभी मैं ने कुछ वक़्त तिरे साथ गुज़ारा था कभी आप को मेरे तआ'रुफ़ की ज़रूरत क्या है मैं वही हूँ कि जिसे आप ने चाहा था कभी अब अगर अश्क उमँडते हैं तो पी जाता हूँ हौसला आप के दामन ने बढ़ाया था कभी अब उसी गीत की लै सोच रही है दुनिया मैं ने जो गीत तिरी बज़्म में गाया था कभी मेरी उल्फ़त ने किया ग़ैर को माइल वर्ना मैं तिरी अंजुमन-ए-नाज़ में तन्हा था कभी कर दिया आप की क़ुर्बत ने बहुत दूर मुझे आप से बोद का एहसास न इतना था कभी दोस्त नादाँ हो तो दुश्मन से बुरा होता है मुझ को अपने दिल-ए-नादाँ पे भरोसा था कभी — Mazhar Imam