Firaq Gorakhpuri

Firaq Gorakhpuri

@firaq-gorakhpuri

Firaq Gorakhpuri shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Firaq Gorakhpuri's shayari and don't forget to save your favorite ones.

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  • Sher
  • Ghazal
  • Nazm

क्यूँ इंतिहा-ए-होश को कहते हैं बे-ख़ुदी
ख़ुर्शीद ही की आख़िरी मंज़िल तो रात है

Firaq Gorakhpuri

बहुत दिनों में मोहब्बत को ये हुआ मा'लूम
जो तेरे हिज्र में गुज़री वो रात रात हुई

Firaq Gorakhpuri

ज़िंदगी क्या है आज इसे ऐ दोस्त
सोच लें और उदास हो जाएँ

Firaq Gorakhpuri

मैं मुद्दतों जिया हूँ किसी दोस्त के बग़ैर
अब तुम भी साथ छोड़ने को कह रहे हो ख़ैर

Firaq Gorakhpuri

ये न पूछ कितना जिया हूँ मैं ये न पूछ कैसे जिया हूँ मैं
कि अबद की आँख भी लग गई मेरे ग़म की शाम-ए-दराज़ में

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बर्क़-ए-फ़ना भी खाए जहाँ ठोकरें 'फ़िराक़'
राह-ए-वफ़ा में आते हैं ऐसे मक़ाम भी

Firaq Gorakhpuri

हर फ़रेब-ए-ग़म-ए-दुनिया से ख़बरदार तो है
तेरा दीवाना किसी काम में हुशियार तो है

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तू याद आया तेरे जौर-ओ-सितम लेकिन न याद आए
मोहब्बत में ये मा'सूमी बड़ी मुश्किल से आती है

Firaq Gorakhpuri
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ख़ैर सच तो है सच मगर ऐ झूठ
मैंने तेरा भी एतिबार किया

Firaq Gorakhpuri
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दिलों को तेरे तबस्सुम की याद यूँ आई
कि जगमगा उठें जिस तरह मंदिरों में चराग़

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मैं हूँ दिल है तन्हाई है
तुम भी होते अच्छा होता

Firaq Gorakhpuri
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वो रातों-रात 'सिरी-कृष्ण' को उठाए हुए
बला की क़ैद से 'बसदेव' का निकल जाना

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बिजली की तरह लचक रहे हैं लच्छे
भाई के है बांधी चमकती राखी

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न कोई वा'दा न कोई यक़ीं न कोई उमीद
मगर हमें तो तिरा इंतिज़ार करना था

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ख़ुश भी हो लेते हैं तेरे बे-क़रार
ग़म ही ग़म हो इश्क़ में ऐसा नहीं

Firaq Gorakhpuri
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मौत का भी इलाज हो शायद
ज़िंदगी का कोई इलाज नहीं

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लहू वतन के शहीदों का रंग लाया है
उछल रहा है ज़माने में नाम-ए-आज़ादी

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सर-ज़मीन-ए-हिंद पर अक़्वाम-ए-आलम के 'फ़िराक़'
क़ाफ़िले बसते गए हिन्दोस्ताँ बनता गया

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शामें किसी को माँगती हैं आज भी 'फ़िराक़'
गो ज़िंदगी में यूँ मुझे कोई कमी नहीं

Firaq Gorakhpuri
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अरे सय्याद हमीं गुल हैं हमीं बुलबुल हैं
तू ने कुछ आह सुना भी नहीं देखा भी नहीं

Firaq Gorakhpuri
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