@firaq-gorakhpuri
Firaq Gorakhpuri shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Firaq Gorakhpuri's shayari and don't forget to save your favorite ones.
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क्यूँ इंतिहा-ए-होश को कहते हैं बे-ख़ुदी
ख़ुर्शीद ही की आख़िरी मंज़िल तो रात है
बहुत दिनों में मोहब्बत को ये हुआ मा'लूम
जो तेरे हिज्र में गुज़री वो रात रात हुई
मैं मुद्दतों जिया हूँ किसी दोस्त के बग़ैर
अब तुम भी साथ छोड़ने को कह रहे हो ख़ैर
ये न पूछ कितना जिया हूँ मैं ये न पूछ कैसे जिया हूँ मैं
कि अबद की आँख भी लग गई मेरे ग़म की शाम-ए-दराज़ में
हर फ़रेब-ए-ग़म-ए-दुनिया से ख़बरदार तो है
तेरा दीवाना किसी काम में हुशियार तो है
तू याद आया तेरे जौर-ओ-सितम लेकिन न याद आए
मोहब्बत में ये मा'सूमी बड़ी मुश्किल से आती है
दिलों को तेरे तबस्सुम की याद यूँ आई
कि जगमगा उठें जिस तरह मंदिरों में चराग़
सर-ज़मीन-ए-हिंद पर अक़्वाम-ए-आलम के 'फ़िराक़'
क़ाफ़िले बसते गए हिन्दोस्ताँ बनता गया
शामें किसी को माँगती हैं आज भी 'फ़िराक़'
गो ज़िंदगी में यूँ मुझे कोई कमी नहीं
अरे सय्याद हमीं गुल हैं हमीं बुलबुल हैं
तू ने कुछ आह सुना भी नहीं देखा भी नहीं