Shiva awasthi

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@Shiva_awasthi

Shiva awasthi shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Shiva awasthi's shayari and don't forget to save your favorite ones.

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  • Sher

Sher

ये किस का अक्स है हर सू समाया छुपा है कौन मेरी पुतलियों में — Shiva awasthi
जाना आधी उम्र बिता कर मुझे ख़ुशी से डर लगता है — Shiva awasthi
मैं ख़ुद पर भी हँस लेती हूँ देख चुकी हूँ इतना रो कर — Shiva awasthi
जितनी चहल पहल दोपहरी उतनी ख़ाली ख़ाली शाम सुरसा जैसी तन्हाई ने लो फिर मेरी खा ली शाम — Shiva awasthi
तुम भी दूर नहीं कर सकते अब तुम को खो देने का दुख — Shiva awasthi
कोई जो आएगा तो फिर समेट ही लेंगे अभी तो ख़ुद को बिखेरे हुए हैं कमरे में — Shiva awasthi
किस तरह कैसे बताते हाल-ए-दिल अपना किसी से रात भर करते रहे अपनी शिकायत आप ही से — Shiva awasthi
वो तो काँधे पर सिर रख कर लौट गई पर गेसू अब भी मफ़लर से लिपटे हैं — Shiva awasthi
गले से यूँँ मुझे लगाओ कभी, कि मेरी पसलियाँ चटख जाएँ — Shiva awasthi
कल मेले में हँस कर मुझ सेे एक खिलौने वाला बोला सब के बच्चे खेलेंगे तो मेरे बच्चे खा पाएँगे — Shiva awasthi
पहन शाखों में बाइज़्जत हमारी आँख की सुर्ख़ी तुम्हारी राह तकता है हमारी राह का सेमल — Shiva awasthi
मुझ को तो अच्छे लगते हैं दुविधा पीर उदासी आँसू — Shiva awasthi
रोती हूँ तो साथ साथ में बजते हैं वो पायल में ऐसे घुॅंघरू बाॅंध गया — Shiva awasthi
प्यार यक़ीनन निकला होगा सागर को मथने ही से वरना खारे ऑंसू पी कर कौन सा पौधा बढ़ता है — Shiva awasthi
ज़िंदगी में व्यस्त हूँ मैं आजकल कुछ इस तरह से साँस तक लेने में ज़ाया' हो रहा है वक़्त मेरा — Shiva awasthi
चलो इक मर्सिया तुम को सिखा दूँ हमारी क़ब्र पर कुछ तो पढ़ोगे — Shiva awasthi
रिश्ता हुआ तमाम तो पगली अना परस्त लौटा गई है तोहफ़े के कुंडल उतार के — Shiva awasthi
पगलाए से बच्चे की तरह ढूँढ़ रही हूँ वो हाथ जो मेले में मुझे छोड़ गया है — Shiva awasthi
नीले लाल निशाँ हैं सारे वरक़ों पर रात किताबों से पागल ने प्यार किया — Shiva awasthi
किसी की आँख का बोसा लिया था, गुलाबी होंठ काले हो गए हैं — Shiva awasthi