Manzar Bhopali

Manzar Bhopali

@manzar-bhopali

Bhopal· India

Manzar Bhopali shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Manzar Bhopali's shayari and don't forget to save your favorite ones.

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Sher

अब समझ लेते हैं मीठे लफ़्ज़ की कड़वाहटें हो गया है ज़िंदगी का तजरबा थोड़ा बहुत — Manzar Bhopali
आँख भर आई किसी से जो मुलाक़ात हुई ख़ुश्क मौसम था मगर टूट के बरसात हुई — Manzar Bhopali
ख़ूब-सूरत ये मोहब्बत में सज़ा दी उस ने फिर गले मिल के मेरी उम्र बढ़ा दी उस ने — Manzar Bhopali
इसी होनी को तो क़िस्मत का लिखा कहते हैं जीतने का जहाँ मौक़ा था वहीं मात हुई — Manzar Bhopali

Ghazal

कोई बचने का नहीं सब का पता जानती है किस तरफ़ आग लगाना है हवा जानती है उजले कपड़ों में रहो या कि नक़ाबें डालो तुम को हर रंग में ये ख़ल्क़-ए-ख़ुदा जानती है रोक पाएगी न ज़ंजीर न दीवार कोई अपनी मंज़िल का पता आह-ए-रसा जानती है टूट जाऊँगा बिखर जाऊँगा हारूँगा नहीं मेरी हिम्मत को ज़माने की हवा जानती है आप सच बोल रहे हैं तो पशेमाँ क्यूँँ हैं ये वो दुनिया है जो अच्छों को बुरा जानती है आँधियाँ ज़ोर दिखाएँ भी तो क्या होता है गुल खिलाने का हुनर बाद-ए-सबा जानती है आँख वाले नहीं पहचानते उस को 'मंज़र' जितने नज़दीक से फूलों की अदा जानती है — Manzar Bhopali
उस को पहली बार ख़त लिक्खा तो दिल धड़का बहुत क्या जवाब आएगा कैसे आएगा डर था बहुत जान दे देंगे अगर दुनिया ने रोका रास्ता और कोई हल न निकला हम ने तो सोचा बहुत अब समझ लेते हैं मीठे लफ़्ज़ की कड़वाहटें हो गया है ज़िंदगी का तजरबा थोड़ा बहुत सोच लो पहले हमारे हाथ में फिर हाथ दो इश्क़ वालों के लिए हैं आग के दरिया बहुत वो थी आँगन में पड़ोसी के मैं घर की छत पे था दूरियों ने आज भी दोनों को तड़पाया बहुत इस से पहले तो कभी एहसास होता ही न था तुझ से मिल कर सोचते हैं रो लिए तन्हा बहुत आँख होती तो नज़र आ जाते छाले पाँव के सच को क्या देखेगा अपना शहर है अंधा बहुत — Manzar Bhopali