तन्हा हुए ख़राब हुए आइना हुएचाहा था आदमी बनें लेकिन ख़ुदा हुएजब तक जिए बिखरते रहे टूटते रहेहम साँस साँस क़र्ज़ की सूरत अदा हुएहम भी किसी कमान से निकले थे तीर सेये और बता है कि निशाने ख़ता हुएपुर-शोर रास्तों से गुज़रना मुहाल थाहट कर चले तो आप ही अपने सज़ा हुए— Nida Fazli