"फ़ातिहा"अगर क़ब्रिस्तान मेंअलग अलग कत्बे न होंतो हर क़ब्र मेंएक ही ग़म सोया हुआ रहता हैकिसी माँ का बेटाकिसी भाई की बहनकिसी आशिक़ की महबूबातुम!किसी क़ब्र पर भी फ़ातिहा पढ़ के चले जाओ— Nida Fazli