@muntazirfirozabadi2345
Muntazir Firozabadi shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Muntazir Firozabadi's shayari and don't forget to save your favorite ones.
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जिस्म पर अब भी निशांँ हैं सब बराबर लुत्फ़ के
ज़ख्म भी कितने हसीं मैंने दिए दिलदार को
इक दूजे की कि़स्मत थे हम इक दूजे से हार गए
मुश्किल तो अब ये लगता है पहले किस पर रोएँ हम
इतनी भी क्या जल्दी है मेरी मूरत बनवाने की
थोड़ा सा तो वक़्त लगेगा खुद पत्थर हो जाने में
ठहर भी जाओ मत उतरो तुम बाद में फिर पछताओगे
मैं दरिया हूँ मुझको केवल प्यास बुझाना आता है
बाहर की बातों को घर के अंदर कौन है लाया
घर के लोगों का भी तो बाहर जाना रहता है
मुहब्बत के समंदर की कलाकारी गज़ब की है
कि सब कुछ डूब जाता है मगर तर कुछ नहीं होता