Muntazir Firozabadi

Muntazir Firozabadi

@muntazirfirozabadi2345

Muntazir Firozabadi shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Muntazir Firozabadi's shayari and don't forget to save your favorite ones.

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  • Sher
  • Ghazal
  • Nazm
जिस्म पर अब भी निशांँ हैं सब बराबर लुत्फ़ के
ज़ख्म भी  कितने  हसीं  मैंने  दिए  दिलदार को
Muntazir Firozabadi
इक  दूजे की  कि़स्मत  थे हम  इक दूजे  से  हार गए
मुश्किल तो अब ये लगता है पहले किस पर रोएँ हम
Muntazir Firozabadi
इतनी भी  क्या जल्दी है  मेरी मूरत  बनवाने की
थोड़ा सा तो वक़्त लगेगा खुद पत्थर हो जाने में
Muntazir Firozabadi
ठहर भी जाओ मत उतरो तुम बाद में फिर पछताओगे
मैं दरिया हूँ मुझको केवल प्यास बुझाना आता है
Muntazir Firozabadi
बाहर की बातों को घर के अंदर कौन है लाया
घर के लोगों का भी तो बाहर जाना रहता है
Muntazir Firozabadi
उसको था शौक बीच समंदर में मरने का
साहिल को खींच खींच के लाना पड़ा मुझे
Muntazir Firozabadi
मुहब्बत के समंदर की कलाकारी गज़ब की है
कि सब कुछ डूब जाता है मगर तर कुछ नहीं होता
Muntazir Firozabadi