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Muntazir Firozabadi
SHER
जिस्म पर अब भी निशांँ हैं सब बराबर लुत्फ़ के
ज़ख़्म भी कितने हसीं मैं ने दिए दिलदार को
Muntazir Firozabadi
10
SHER
इक दूजे की कि़स्मत थे हम इक दूजे से हार गए
मुश्किल तो अब ये लगता है पहले किस पर रोएँ हम
Muntazir Firozabadi
9
SHER
इतनी भी क्या जल्दी है मेरी मूरत बनवाने की
थोड़ा सा तो वक़्त लगेगा ख़ुद पत्थर हो जाने में
Muntazir Firozabadi
8
SHER
ठहर भी जाओ मत उतरो तुम बा'द में फिर पछताओगे
मैं दरिया हूँ मुझ को केवल प्यास बुझाना आता है
Muntazir Firozabadi
7
SHER
बाहर की बातों को घर के अंदर कौन है लाया
घर के लोगों का भी तो बाहर जाना रहता है
Muntazir Firozabadi
6
SHER
उस को था शौक बीच समुंदर में मरने का
साहिल को खींच खींच के लाना पड़ा मुझे
Muntazir Firozabadi
5
SHER
मुहब्बत के समुंदर की कलाकारी ग़ज़ब की है
कि सब कुछ डूब जाता है मगर तर कुछ नहीं होता
Muntazir Firozabadi
4
NAZM
"दास्ताँ-ए-मुन्तज़िर"
— Muntazir Firozabadi
3
GHAZAL
जो मुझ से दूर जाना चाहता था
वो मेरे साथ ही पकड़ा गया था
Muntazir Firozabadi
2
GHAZAL
क़ुर्बत के उन दिनों में भी जाना पड़ा मुझे
आँखों से अपनी राज़ छुपाना पड़ा मुझे
Muntazir Firozabadi
1
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