Rohit tewatia  'Ishq'

Rohit tewatia 'Ishq'

@Rohittewatia

Rohit tewatia 'Ishq' shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Rohit tewatia 'Ishq''s shayari and don't forget to save your favorite ones.

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Sher

कमी ये है बना कर सोचता हूँ कि ये रिश्ता बहुत महँगा पड़ेगा — Rohit tewatia 'Ishq'
रोज़ ख़ुद को दिखा कर इक तस्वीर पूछता हूँ कि अब क़रार आया — Rohit tewatia 'Ishq'
लोग कहने लगे थे सितारा मुझे एक लड़की ने नीचे उतारा मुझे — Rohit tewatia 'Ishq'
अगर मैं इश्क़ में पागल हुआ फिर ज़ियादा बढ़ गई दीवानगी तो — Rohit tewatia 'Ishq'
वो और बात कि बर्बाद हो गए हैं हम मगर ये दिल भी लगाना बहुत ज़रूरी था — Rohit tewatia 'Ishq'
भोली थी वो चाँद से खेला करती थी मैं जुगनू को चाँद बताया करता था — Rohit tewatia 'Ishq'
इतना खो जाता था उस की आँखों में चिड़िया उड़ में भैंस उड़ाया करता था — Rohit tewatia 'Ishq'
उस को तो मुझ सेे मोहब्बत ही नहीं होती माँ तुम तो कहती थीं कि सोहबत का असर आता है — Rohit tewatia 'Ishq'
एक-तरफ़ा था मेरा प्यार मगर पूरी शिद्दत से प्यार करता रहा — Rohit tewatia 'Ishq'
मैं अपने बाप सा अच्छा नहीं हूँ मेरा हिस्सा तुम्हें देना पड़ेगा — Rohit tewatia 'Ishq'
मैं भी मजनू सा दुनिया से लड़ता मगर पहला पत्थर ही लैला ने मारा मुझे — Rohit tewatia 'Ishq'
मेरी सोहबत में ख़ुद डूबने लग गया दे रहा था जो तिनका सहारा मुझे — Rohit tewatia 'Ishq'
उस की ख़ुशबू ने कर दिया हैरान वो जिसे फूल भेजने थे मुझे — Rohit tewatia 'Ishq'
मैं ने भी कुछ हिंदी फ़िल्में देखी हैं लड़का लड़की दोस्त नहीं होते हैं दोस्त — Rohit tewatia 'Ishq'
वो भी मुझ सेे इश्क़ की बातें करती थी मैं भी उस के ख़्वाब में आया करता था — Rohit tewatia 'Ishq'
काम करने को थे बहुत फिर भी मैं तेरा इंतिज़ार करता रहा — Rohit tewatia 'Ishq'
आओ मेरी बाहों में कि दुनिया को भुला दो दुनिया के लिए आप का बीमार बहुत है — Rohit tewatia 'Ishq'

Ghazal

मेरी हालत पे लगा ध्यान मेरा दुख समझे जो कोई दुख से हो अंजान मेरा दुख समझे सारी दुनिया जो मेरे दुख से पशेमान है अब अब तो लाज़िम है कि भगवान मेरा दुख समझे मेरे दुख को वो न समझे तो कोई बात नहीं अपने दुख को तो मेरी जान मेरा दुख समझे है ज़माने में कोई शख़्स मेरी टक्कर का है जो कर दे मुझे हैरान मेरा दुख समझे मेरी सय्याद से विनती है रिहाई बख़्शे खोल दे आज ये ज़िंदान मेरा दुख समझे अपने हर ग़म का हर इक दर्द का रुस्वाई का कर दिया आपने ऐलान मेरा दुख समझे इश्क़' अपना भी तो दीवान छपेगा इक दिन जिस का रक्खेंगे हम उनवान मेरा दुख समझे — Rohit tewatia 'Ishq'
सच न होता बा-ख़ुदा कहता नहीं कोई हम ने आप सा देखा नहीं फूल भी काँटे सा फिर चुभता नहीं काश हम दिल देखते चेहरा नहीं चाँद का ये दाग़ ही है जान-ए-मन चाँद गर जो आप से मिलता नहीं मैं दिवाना हूँ दिवाना आप का ख़ुद बताओ देख कर लगता नहीं दुनियादारी के चलन को देख कर मैं सियाना हो गया हूँ था नहीं वो अगर मेरा हुनर पहचानता ख़ुद से आ कर तो कभी भिड़ता नहीं उस के बारे में यही अच्छी है बात लड़खड़ाता है मगर गिरता नहीं बे-वफ़ा सुन मैं नहीं अहमद फ़राज़ छोड़ के जाना है तो तू आ नहीं इश्क़ में हो हौसले की बात गर मैं किसी के बाप से डरता नहीं — Rohit tewatia 'Ishq'
हवा देती है ज़ालिम ज़ख़्म पर मरहम नहीं होती ये दुनिया ग़म बढ़ाती है शरीक-ए-ग़म नहीं होती मेरे माँ बाप ख़ुश होते हैं मेरे मुस्कुराने से मगर अफ़सोस ये बरसात भी पैहम नहीं होती मुझे वो छोड़ कर जाती नहीं तो क्या नहीं होता बस अलमारी में उस की याद की अल्बम नहीं होती उसे बाहों में भर लेता हूँ मैं अपनी अचानक से सो मेरे यार की धड़कन कभी मद्धम नहीं होती बिछड़ जाएँ तो दिल वालो की चाहत और बढ़ती है किसी सूरत ख़ुदाओं की इबादत कम नहीं होती ज़माने भर में अपना इश्क़ था मशहूर लेकिन अब वो पायल तो पहनती है मगर छम छम नहीं होती — Rohit tewatia 'Ishq'

Nazm

"क़िस्मत" कभी सोचता हूँ मेरा हक़ है उस पर वही जो किसी और की हो चुकी है वो लड़की जो क़िस्मत में मेरे लिखी थी लकीरों से मेरी कहीं खो चुकी है कभी सोचता हूँ बहुत सोचता हूँ मगर अब करूँँ तो करूँँ क्या भला मैं निगाहों में उस का ही चेहरा बसा है उसी को ये दिल मानता अब ख़ुदा है ये दिल अब धड़कता ही उस के लिए है ये पागल तड़पता ही उस के लिए है कभी सोचता हूँ बहुत सोचता हूँ मैं कितना अभागा हूँ कह भी न पाया पनाहों में अपनी छिपा लो ना मुझ को मेरी बेख़ुदी से बचा लो ना मुझ को मुझे चैन पड़ता नहीं बिन तुम्हारे घड़ी भर गले से लगा लो ना मुझ को सुनो तुम सेे इक राज़ की बात कह दूँ ये चाहत बनी ही हमारे लिए थी मोहब्बत बनी ही हमारे लिए थी नहीं मैं ये हरगिज़ नहीं मान सकता कोई मुझ सेे ज़्यादा तुम्हें चाहता है ये वो सच है जिस का तुम्हें भी पता है मेरे जैसा कोई दिवाना नहीं है मगर तुम को दिल ही लगाना नहीं है कभी सोचता हूँ जो मेरी नहीं हो तो जिस की हो उस सेे चुरा लू मैं तुम को कभी सोचता हूँ कि ग़ज़लों में अपनी पिरो कर ज़रा गुनगुना लूँ मैं तुम को मगर जैसे क़िस्मत बदल सी गई है कि जैसे हर इक शख़्स ने बस हमें दूर करने की साज़िश रची है ग़लत हो रहा है अगर ये सही है कभी सोचता हूँ बहुत सोचता हूँ — Rohit tewatia 'Ishq'
"नादान परी" वो मेरी नादान परी सब सेे छिपकर रहती थी अक्सर मुझ सेे कहती थी छोड़ो प्यार व्यार की बातें हिस्से आती तन्हा रातें इस सेे क्या ही मिल पाएगा जो है वो भी ख़ो जाएगा मैं ने सोचा सच ही तो है प्यार किसे ही मिल पाया है इस को तो एहसास दिला दूँ दुनिया से भी मैं लड़ लूँगा क़िस्मत से कैसे जीतूँगा मैं तो ये ग़म पाल ही लूँगा टूटा दिल सँभाल ही लूँगा वो तो सचमुच मर जाएगी और फिर कुछ ना कर पाएगी उस को एक जीवन जीना है मुझ को हर आँसू पीना है वैसे भी क्या ही है मुझ में मेरे जैसे कितने होंगे मेरे होने से क्या होगा बस इक गिनती बढ़ जाएगी उस के आगे अड़ जाएगी मेरा जाना ही बेहतर है साँस ही लेनी है ले लूँगा जान ही देनी है दे दूँगा जान तो वैसे भी उस की है उस को कहाँ मालूम है इतना वो मेरी नादान परी — Rohit tewatia 'Ishq'
"लव ट्राईऐंगल" जब ख़यालों में मैं उस के पीछे पीछे जाता भाव खाती देखो फिर मैं उस सेे रुठ जाता ऐसे वैसे कैसे कैसे मुझ को वो मनाती जान थी मेरी वो कैसे मैं ना मान पाता अपने लव का ट्राईऐंगल काश जो ना बनता तू सवाल और तेरा मैं जवाब होता काश जो तू मेरी आँखों में वो झाँक जाती तेरे पास में जो महका मैं गुलाब होता अगर ये ख़्वाब सच हुआ तो सुनले ऐ हसीं मैं पूरी उम्र तेरे दिल में ही गुज़ार दूँ तू जो चले तो दिन हो जब रूके तो रात हो ये काएनात तेरे क़दमों में उतार दूँ अपने लव का ट्राईऐंगल काश जो ना बनता काश जो तू बोले तेरी मैं आवाज़ होता तू शबाब तेरी धुन में मैं शराब होता सबके चेहरों को तो तू यूँँ निहार जाती तेरे नैनों का कभी तो मैं शिकार होता अपने लव का ट्राईऐंगल काश जो ना बनता — Rohit tewatia 'Ishq'
"ख़्वाब" कभी मैं कह नहीं पाया कि तुझ सेे वास्ता क्या है तू मेरे दिल मेरी धड़कन मेरी साँसों का हिस्सा है तेरा होना भी है मुझ को मगर होने से डरता हूँ तुझे पाया नहीं फिर भी तुझे खोने से डरता हूँ मेरी जाँ तू मेरे ख़्वाबों ख़यालों में ही रहती है मैं इक पागल दिवाना हूँ हमेशा मुझ सेे कहती है मगर जो तू हक़ीक़त में कभी आए तो जानेगी मुझे कितनी मोहब्बत है जो देखेगी तो मानेगी अगर ये ख़्वाब सच होता तो हम तुम साथ में रहते सताती तू मुझे दिनभर तो सारा दिन मनाती भी बिना मतलब की बातों पर तू मुझ सेे रूठ जाती भी सुनो ना जाँ ज़रा सी बात पर रूठा नहीं करते मगर ये चाँद तारे भी तो अब टूटा नहीं करते भला कैसे मैं ये कह दूँ कि इनको तोड़ लाऊँगा हवाओं को घटाओं को फ़िज़ा को मोड़ लाऊँगा तेरी हर इक अदा पे हम ये दिल हारे हैं मेरी जाँ तो तेरे सामने क्या चाँद क्या तारे है मेरी जाँ मेरे बस में बस इतना हो कि तुझ को जीत पाऊँ मैं तेरे दिल की हर इक ख़्वाहिश को जाँ अपना बनाऊँ मैं मेरी पलकों के साए में तू अपने ख़्वाब रख देना परेशानी के भी अपने सभी अस्बाब रख देना मैं तेरे वास्ते फिर इक नई दुनिया बनाऊँगा तुझे ही याद रखूँगा जहाँ को भूल जाऊँगा फिर इक इक कर के सारे राज़ दिल के खोल दूँगा मैं यहाँ जो कह नहीं पाया वहाँ वो बोल दूँगा मैं — Rohit tewatia 'Ishq'
‘’निगाह’’ किस की ऐसी हया भरी निगाह देखोगी अक्स मेरा मिलेगा जिस जगह देखोगी जान मोहब्बत फ़िज़ूल नहीं बस थोड़ा सब्र करो नाग़वार गुज़रे इश्क़ की पनाह देखोगी किस की ऐसी हया भरी निगाह देखोगी पर मसअला कुछ इनकार का ज़रूर रहा होगा जिस सेे ख़ुद बे-ख़बर हूँ वो मेरा क़ुसूर रहा होगा फिर इल्ज़ाम सारे बेबुनियाद से आएँगे आगे मेरे ख़िलाफ़ ना एक मिलेगा जो गवाह देखोगी किस की ऐसी हया भरी निगाह देखोगी पर तेरा छोड़ के जाना मोहब्बत की तौहीन था मेरा क्या? मेरा दिल तो टूटने का शौक़ीन था अभी एक दुआ क़ुबूल होनी आम बात समझती हो फिर कोई मंदिर और सालो साल कोई दरग़ाह देखोगी किस की ऐसी हया भरी निगाह देखोगी — Rohit tewatia 'Ishq'
"भूल जाऊँगा?" मोहब्बत के सारे सितम भूल जाऊँगा? बे-असर से ज़ख़्मों के मरहम भूल जाऊँगा? माना टूटा हूँ पर तू ने सोचा भी कैसे के तुझ को मैं मेरे सनम भूल जाऊँगा तेरा लहरों सा चलना ज़ेहन में बसा है उन आँखों की कैसे शरम भूल जाऊँगा? चलो ना होश रहा के शुरुआत कैसे हुई कैसे कब हुआ मैं ख़तम भूल जाऊँगा माना टूटा हूँ पर तू ने सोचा भी कैसे तेरी पायल का शोर जैसे शहनाई कोई जो पाक़ लगे वो क़दम भूल जाऊँगा? वो सादग़ी तेरी जो नज़रें तक ना मिलीं हँसकर सह गया जो मैं ग़म भूल जाऊँगा? माना टूटा हूँ पर तू ने सोचा भी कैसे हम जुदा नहीं बस फ़ासले दौरानियाँ हैं तुझे याद कर हर जनम भूल जाऊँगा? प्यार मिलता नहीं जीते जी ये सुना है मैं बेहोशी में ये भरम भूल जाऊँगा माना टूटा हूँ पर तू ने सोचा भी कैसे — Rohit tewatia 'Ishq'