मुझ को ग़म-ख़्वार की ज़रूरत थी
अपने इक यार की ज़रूरत थी
आप का दोस्त बन गया हूँ मैं
आप के प्यार की ज़रूरत थी
थी ज़रूरत मुझे मोहब्बत की
दिल को दिलदार की ज़रूरत थी
हुस्न से उस का काम चलता था
हम को अश'आर की ज़रूरत थी
होंठ प्यासे थे और बोसे को
उस के रुख़्सार की ज़रूरत थी
झूट अफ़वाह बन के रह जाता
सच को अख़बार की ज़रूरत थी
इश्क़ पिछली सदी में होता था
मुझ को रफ़्तार की ज़रूरत थी
— Rohit tewatia 'Ishq'















