जो नशा था उतर गया साहब
दिल मोहब्बत से डर गया साहब
मुझ
में अब और कोई ज़िंदा है
वो जो आशिक़ था मर गया साहब
दूसरे इश्क़ की फ़िराक़ में हूँ
ज़ख़्म पहला तो भर गया साहब
— Rohit tewatia 'Ishq'
दिल मोहब्बत से डर गया साहब
मुझ
में अब और कोई ज़िंदा है
वो जो आशिक़ था मर गया साहब
दूसरे इश्क़ की फ़िराक़ में हूँ
ज़ख़्म पहला तो भर गया साहब
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