उस को सौ सौ बार पुकारा
फिर चौखट में सर दे मारा
रो रो कर बोला था मैं ने
रुक जाओ ना यार ख़ुदारा
वो थी मुझ को चाँद सी पूरी
मैं था उस का टूटा तारा
जाल उसी के पास था बेशक
मछली थी वो मैं मछुआरा
वो कहती थी किस का बच्चा
मैं कहता था जान तुम्हारा
— Rohit tewatia 'Ishq'















