Rishta Shayari - Poetic Verses Celebrating Relationships and Bonds

Explore a beautiful collection of Rishta Shayari that captures the essence of relationships, love, and deep emotional connections. These poetic lines reflect the beauty, trust, and strength of rishta (bonds) in life.

Best Rishta Shayari on Relationships and Trust

sambandh shayari
प्यार का रिश्ता ऐसा रिश्ता शबनम भी चिंगारी भी
यानी उनसे रोज़ ही झगड़ा और उन्हीं से यारी भी
Ateeq Allahabadi
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हमारे घर के रिश्तों में अभी बारीकियाँ कम हैं
भतीजा मार खाता है तो चाचा बोल देते हैं
Nirbhay Nishchhal
खाक हो जायेंगे हम खाक में मिल कर तेरी
तुझसे रिश्ता न कभी अरज़े वतन टूटेगा
Hashim Raza Jalalpuri
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वक़्त, वफ़ा, हक़, आँसू, शिकवे जाने क्या क्या माँग रहे थे
एक सहूलत के रिश्ते से हम ही ज़्यादा माँग रहे थे

उसकी आँखे उसकी बातें उसके लब वो चेहरा उसका
हम उसकी हर एक अदा से अपना हिस्सा माँग रहे थे
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Shikha Pachouly
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तू समझता है कि रिश्तों कि दुहाई देंगे
अरे हम तो वो हैं तेरे चेहरे से दिखाई देंगे
Waseem Barelvi
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Heart Touching Rishta Shayari in Hindi

rishton shayari
हमारा ख़ून का रिश्ता है सरहदों का नहीं
हमारे ख़ून में गँगा भी चनाब भी है
Kanval Ziai
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कैसे कहें कि तुझ को भी हम से है वास्ता कोई
तू ने तो हम से आज तक कोई गिला नहीं किया
Jaun Elia
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तो क्या ये हो नहीं सकता कि तुझ से दूर हो जाऊंँ
मैं तुझ को भूलने के वासते मजबूर हो जाऊँ

सुना है टूटने पर दिल सभी कुछ कर गुजरते हैं
मुझे भी तोड़ दो इतना कि मैं मशहूर हो जाऊँ
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SHIV SAFAR
ऐसी हैं क़ुर्बतें के मुझी में बसा है वो
ऐसे हैं फ़ासले के नहीं राब्ता नसीब
Afzal Ali Afzal
मुझको जीने का हौसला दीजे
वरना रिश्तों का फ़ाएदा क्या है
Praveen Sharma SHAJAR
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Emotional Rishta Shayari on Love and Bonding

rishte shayari
चराग़ में रौशनी माना कम है
मग़र मिरे हौंसलों में भी दम है

हवा से है दोस्ताना मेरा भी
उड़ान के वास्ते इक आसमाँ कम है
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Kumar Rishi
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इतना धीरे-धीरे रिश्ता ख़त्म हुआ
बहुत दिनों तक लगा नहीं हम बिछड़े हैं
Ajmal Siddiqui
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ऐसे रिश्ते का कोई अस्तित्व नहीं
हरदम जिसमें यक़ीं दिलाना पड़ता है
SHIVANKIT TIWARI "SHIVA"
हर एक सम्त यहाँ वहशतों का मस्कन है
जुनूँ के वास्ते सहरा ओ आशियाना क्या
Azhar Iqbal
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धूप भी आराम करती थी जहाँ
अपना ऐसी छाँव से नाता रहा
Madan Mohan Danish
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Beautiful Rishta Shayari in Urdu

rishtaa shayari
रिश्तों को जब धूप दिखाई जाती है
सिगरेट से सिगरेट सुलगाई जाती है
Ankit Gautam
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अंदर की दुनिया से रब्त बढ़ाओ 'आनिस'
बाहर खुलने वाली खिड़की बंद पड़ी है
Aanis Moin
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मिरी तरफ़ से तो टूटा नहीं कोई रिश्ता
किसी ने तोड़ दिया ए'तिबार टूट गया
Akhtar Nazmi
फिर उसके बाद कोई सिलसिला नहीं रक्खा
जिसे मुआफ़ किया, राब्ता नहीं रक्खा
Renu Nayyar
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रिश्तों की दलदल से कैसे निकलेंगे
हर साज़िश के पीछे अपने निकलेंगे
Shakeel Jamali
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Short Rishta Shayari for Instagram Captions

naata shayari
ज़िंदगी तुझ से भी क्या ख़ूब तअल्लुक़ है मिरा
जैसे सूखे हुए पत्ते से हवा का रिश्ता
Khalish Akbarabadi
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मिला है दुख सदा मुझको मेरा दुख से ये नाता है
मिरे ख़ुद घाव में मरहम लगा कर दुख सुलाता है
Tiwari Jitendra
हमको तो प्यार चाहिए था तेरा प्यार सिर्फ़
इस बात से वफ़ा का कोई वास्ता नहीं
Vikas Rajput
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कितनी मुश्किल के बाद टूटा है
एक रिश्ता कभी जो था ही नहीं
Shahbaz Rizvi
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जीत भी लूं गर लड़ाई तुम से मैं तो क्या मिलेगा
हाथ में दोनों के बस इक टूटा सा रिश्ता मिलेगा

कर के लाखों कोशिशें गर जो बचा भी लूँ मैं रिश्ता
तो नहीं फिर मन हमारा पहले के जैसा मिलेगा
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Ankit Maurya
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Poetic Rishta Shayari on Family and Friendship

मेरी जवानी को कमज़ोर क्यों समझते हो
तुम्हारे वास्ते अब भी शबाब बाक़ी है

ये और बात है बोतल ये गिर के टूट गई
मगर अभी भी ज़रा सी शराब बाक़ी है
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Paplu Lucknawi
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उसके बदन को दी नुमूद हमने सुखन में और फिर
उसके बदन के वास्ते इक क़बा़ भी सी गई
Jaun Elia
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एक रिश्ता जिसे मैं दे न सका कोई नाम
एक रिश्ता जिसे ता-उम्र निभाए रक्खा
Aks samastipuri
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किस वास्ते लिक्खा है हथेली पे मिरा नाम
मैं हर्फ़-ए-ग़लत हूँ तो मिटा क्यूँ नहीं देते
Hasrat Jaipuri
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अपना रिश्ता ज़मीं से ही रक्खो
कुछ नहीं आसमान में रक्खा
Jaun Elia
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Rishta Shayari on Commitment and Loyalty

नया इक रिश्ता पैदा क्यूँ करें हम ?
बिछड़ना है तो झगडा क्यूँ करें हम?
Jaun Elia
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कौन सी दीवार है मौजूद इस रिश्ते में 'साज़'
क्यूँ नहीं रो सकते हम अपने पिता के सामने
Siddharth Saaz
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अब मज़ीद उससे ये रिश्ता नहीं रक्खा जाता
जिससे इक शख़्स का पर्दा नहीं रक्खा जाता

पढ़ने जाता हूँ तो तस्मे नहीं बाँधे जाते
घर पलटता हूँ तो बस्ता नहीं रक्खा जाता
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Tehzeeb Hafi
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मकाँ तो है नहीं जो खींच दें दीवार इस दिल में
कोई दूजा नहीं रह पाएगा अब यार इस दिल में

जहाँ भर में लुटाते फिर रहे है कम नहीं होता
तुम्हारे वास्ते इतना रखा था प्यार इस दिल में
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Bhaskar Shukla
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हमें पढ़ाओ न रिश्तों की कोई और किताब
पढ़ी है बाप के चेहरे की झुर्रियाँ हम ने
Meraj Faizabadi
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Thoughtful Rishta Shayari on Emotional Ties

घर में झीने रिश्ते मैंने लाखों बार उधड़ते देखे
चुपके चुपके कर देती है जाने कब तुरपाई अम्मा
Aalok Shrivastav
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मंज़र बना हुआ हूँ नज़ारे के साथ मैं
कितनी नज़र मिलाऊँ सितारे के साथ मैं

दरिया से एक घूँट उठाने के वास्ते
भागा हूँ कितनी दूर किनारे के साथ मैं
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Khalid Sajjad
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पहले ये रब्त मेरी ज़रूरत बनाओगे
और फिर कहोगे राब्ता मुमकिन नहीं रहा
Khurram Afaq
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उसको भी उसकी बाँहों में सोना होगा
सोना ही है रिश्तों की भी मजबूरी है
Umesh Maurya
ख़्वाबों को आँखों से मिन्हा करती है
नींद हमेशा मुझसे धोखा करती है

उस लड़की से बस अब इतना रिश्ता है
मिल जाए तो बात वग़ैरा करती है
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Tehzeeb Hafi
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Inspirational Rishta Shayari on Unity and Togetherness

कुछ रिश्तों में दिल को आज़ादी नइँ होती
कुछ कमरों में रौशनदान नहीं होता है
Vikram Gaur Vairagi
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निभाया जिससे भी रिश्ता तो फिर हद में रहे हैं हम
किसी के मखमली तकिये के ऊपर सर नहीं रक्खा
Nirbhay Nishchhal
सभी रिश्तें मैं यूँ बचाए हूँ जैसे
तड़पते दियों को हवा देते रहना
Parul Singh "Noor"
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अगर लगता है वो क़ाबिल नहीं है
तो रिश्ता तोड़ना मुश्किल नहीं है

रक़ीब आया है मेरे शे'र सुनने
तो अब ये जंग है महफ़िल नहीं है
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Tanoj Dadhich
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हम मुहब्बत में किसी के वास्ते
जी नहीं सकते तो मर तो सकते हैं
Sunny Seher

Rishta Shayari on Life and Heartfelt Connections

देखो ऐसे क़रीब आने की आस मत लगाओ तुम
तन्हाई से रब्त बढ़ाओ फिर मेरे पास आओ तुम
Rohit tewatia 'Ishq'
उसे अभी भी मेरे दिल के हाल का नहीं पता
तो यानी उसको अपने घर का रास्ता नहीं पता

ये तेरी भूल है ऐ मेरे ख़ुश-ख़याल के मुझे
पराई औरतों से तेरा राब्ता नहीं पता
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Ruqayyah Maalik
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टूटते रिश्तों से बढ़कर रंज था इस बात का
दरमियाँ कुछ दोस्त थे, और दोस्त भी ऐसे, के बस
Renu Nayyar
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राब्ता लाख सही क़ाफ़िला-सालार के साथ
हम को चलना है मगर वक़्त की रफ़्तार के साथ
Qateel Shifai
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तमाम मस'अले उठाए फिर रहे हैं हम
इसीलिए भी चलते चलते थक गए हैं हम

थे कितने कम-नसीब हम कि राबता न था
हैं कितने ख़ुशनसीब तुझ को छू रहे हैं हम
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Siddharth Saaz