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मकाँ तो है नहीं जो खींच दें दीवार इस दिल में  - Bhaskar Shukla

मकाँ तो है नहीं जो खींच दें दीवार इस दिल में
कोई दूजा नहीं रह पाएगा अब यार इस दिल में

जहाँ भर में लुटाते फिर रहे है कम नहीं होता
तुम्हारे वास्ते इतना रखा था प्यार इस दिल में

Bhaskar Shukla
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