Nirbhay Nishchhal

Nirbhay Nishchhal

@nirbhaypr5910083

Nirbhay Shayar shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Nirbhay Shayar's shayari and don't forget to save your favorite ones.

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Sher

तुम्हारे बिन भला मैं ठीक हूँगा तुम्हारे बिन मैं ज़िंदा हूँ बहुत है — Nirbhay Nishchhal
अँधेरा इतना गहरा है चमन में कि हर एक फूल पर पहरा लगा है — Nirbhay Nishchhal
मैं भी लिख सकता हूँ ग़ज़लें लगभग सारी बहरों में सबके इंचीटेप के डर से मुक्तक लिखना पड़ता है — Nirbhay Nishchhal
मेरे जीवन में जेठ जैसे तुम जब से आई उदास हूँ तब से — Nirbhay Nishchhal
आज लगता है जंग जीती है प्यार की बाजी हार कर मैं ने — Nirbhay Nishchhal
राम तुम्हारे स्वागत में ये देखो तो धरती अंबर चाँद सितारे हाजिर हैं — Nirbhay Nishchhal
मुझ को फ्यूचर की चिंता है तुम को मेकअप की चिंता हम दोनों का मेल मिलेगा यार बहुत दुश्वारी है — Nirbhay Nishchhal
तुम्हारी बातों से लगता है मुझ को तुम्हारा दिल कभी टूटा था यारा — Nirbhay Nishchhal
मेरे दिल की बात समझना तेरे बस की बात नहीं, हम दोनों में बात-विवाद का कारण तेरा ईगो है — Nirbhay Nishchhal
हमारे दुख से बढ़कर भी कोई दुख ज़माने में भला क्या होता होगा — Nirbhay Nishchhal
कुछ चीज़ें भगवान के हाथों होती हैं हम सब केवल दर्शक बन रह जाते हैं — Nirbhay Nishchhal
तुम्हारे नेह से वंचित बना बैठा हूँ गंगाधर अगर तुम प्यार से छू लो तो शक्तिमान बन जाऊँ — Nirbhay Nishchhal
प्यार करना अगर ग़लत है तो ब्याह करना भला सही कैसे — Nirbhay Nishchhal
मुझे परफ्यूम देकर जा चुकी है वो ख़ुशबू जो मेरी चाहत कभी थी — Nirbhay Nishchhal
चाय का एक कप उदास है अब जब से तुम छोड़ कर गईं मुझ को — Nirbhay Nishchhal
कभी किसी पे मेरा दिल कहीं न आ जाए बस इस लिए मैं तुम्हें बार बार सोचता हूँ — Nirbhay Nishchhal
तुम को गर आकाश में उड़ना है तो फिर धरती के लोगों का चक्कर मत काटो — Nirbhay Nishchhal
मना लो यार मेरी जान तुम हर बार ये राखी तेरा भाई है मेरा यार क्या इनकार ये राखी — Nirbhay Nishchhal
कभी तुम सेे मेरी लड़ाई न हो इस लिए तुम सेे दूर जाना है — Nirbhay Nishchhal
बात करने से डर रहा हूँ मैं बात करने से बात बनती है — Nirbhay Nishchhal

Nazm

"आ जाओ ना बाबा मुझ को नाती कौन पुकारेगा" आप जो मुझ सेे दूर हुए अब मुझ को मौन पुकारेगा आजाओ ना बाबा मुझ को नाती कौन पुकारेगा घर के हर सामान पे हरदम आप का पहरा रहता था मेरा बाहर छूट गया जो आप को फोन पुकारेगा एक बड़े बरगद के जैसे पूरे घर पे छाया थी घर का हर एक बच्चा-बच्चा शनि से सोम पुकारेगा एक हमारी दादी हैं जो दिन भर रोया करती हैं रो रो कर वो कहती हैं अब मुझ को कौन पुकारेगा एक बुआ बाहर रोती हैं एक बुआ तो आँगन में दोनों रो कर कहती हैं अब बेटी कौन पुकारेगा कर्म आप के अच्छे थे ये धरती-अम्बर जाना है हिन्दू मुस्लिम सिख ईसाई हर एक कौम पुकारेगा धूप धूल और बारिश से घर की रखवाली करते थे ऐसा पेड़ जिसे भी मिले वो हर एक यौम पुकारेगा मैं तो ठहरा छोटा बालक मेरी अभी उमर है क्या बाबा के साए में था जो रोम-रोम पुकारेगा — Nirbhay Nishchhal