कोई तो हो जो मेरा हाल पूछे
    कोई तो हो जिसे चिंता हो मेरी
    Nirbhay Nishchhal
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    मैं तुम्हें लिखना चाहता हूँ अब
    तुम मेरी शायरी बनोगी क्या
    Nirbhay Nishchhal
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    अब तुम बदल गए हो यारा
    बिलकुल सफल नहीं होगे अब
    Nirbhay Nishchhal
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    कभी हमसे हमारा हाल पूछो
    मैं तुमको सब बताना चाहता हूँ
    Nirbhay Nishchhal
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    हवस की आग में जलकर जो लड़की डूब जाती है
    ख़ुदा देता सितम तो जल्दी शादी ही नहीं होती
    Nirbhay Nishchhal
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    मुझे बस एक मौका दे दो जानांँ
    तुम्हारी मांँग भरना चाहता हूँ
    Nirbhay Nishchhal
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    निभाया जिससे भी रिश्ता तो फिर हद में रहे हैं हम
    किसी के मखमली तकिये के ऊपर सर नहीं रक्खा
    Nirbhay Nishchhal
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    तुम्हारे साथ था तो मैं गम-ए-उल्फ़त में उलझा था
    तुम्हें छोड़ा तो ये जाना कि दुनिया ख़ूबसूरत है
    Nirbhay Nishchhal
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    तुझे खोने का डर नहीं मुझमें
    तेरे ज़ुल्मों से भर गया हूँ मैं
    Nirbhay Nishchhal
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    तुमको अब नींद बहुत आती है
    मुझसे अब पेट भर गया है क्या
    Nirbhay Nishchhal
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