वक़्त, वफ़ा, हक़, आँसू, शिकवे जाने क्या क्या माँग रहे थेएक सहूलत के रिश्ते से हम ही ज़्यादा माँग रहे थेउस की आँखें उस की बातें उस के लब वो चेहरा उस काहम उस की हर एक अदा से अपना हिस्सा माँग रहे थे— Shikha Pachouly