Ajmal Siddiqui

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@ajmal-siddiqui

Ajmal Siddiqui shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Ajmal Siddiqui's shayari and don't forget to save your favorite ones.

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Sher

इतना धीरे-धीरे रिश्ता ख़त्म हुआ बहुत दिनों तक लगा नहीं हम बिछड़े हैं — Ajmal Siddiqui

Ghazal

न नज़र से कोई गुज़र सका न ही दिल से मलबा हटा सका न वो दर बचा न वो घर बचा तेरे बा'द कोई न आ सका न वो हिस किसी में न ताब है मिरा ग़म तो ख़ैर उठाए कौन वो जो मिस्रा ग़म का था तर्जुमाँ कोई उस को भी न उठा सका कभी ख़ौफ़ था तिरे हिज्र का कभी आरज़ू के ज़वाल का रहा हिज्र-ओ-वस्ल के दरमियाँ तुझे खो सका न मैं पा सका मिरे दिल में तुख़्म-ए-यक़ीन रख दे लचक तू शाख़-ए-मिज़ाज को वो चमन खिला मिरे बाग़बाँ जो चमन कोई न खिला सका मिरे साथ सु-ए-जुनून चल मिरे ज़ख़्म खा मिरा रक़्स कर मिरे शे'र पढ़ के मिलेगा क्या पता पढ़ के घर कोई पा सका? जो लिखो इबारत-ए-इश्क़ तुम तो अना का कोई न पेच हो जो लब-ए-दवात पे झुक गया वो क़लम ही नक़्श बना सका — Ajmal Siddiqui
अलग अलग तासीरें इन की, अश्कों के जो धारे हैं इश्क़ में टपकें तो हैं मोती, नफ़रत में अंगारे हैं तुम से मिल कर खिल उठता था, तुम से छूट के फीका हूँ ऐ रंगरेज़ मिरे चेहरे के सारे रंग तुम्हारे हैं गरमी की लू में तपने के ब'अद ही पानी का है मज़ा तुझ को जीतना आसाँ था, हम जान के तुझ को हारे हैं ऐ पुर्वाई मेरी ख़ुशबू उस चौखट के दम से है तू भी गुज़र के देख जहाँ मैं ने कुछ लम्हे गुज़ारे हैं मुँह से बताओ या न बताओ तुम हम को दिल की बातें जान-ए-मन ये नैन तुम्हारे, ये जासूस हमारे हैं ऐसी बात मिलन में कब होगी जैसी इस पल में है सब के बीच में मैं हूँ, वो है ओर ख़ामोश इशारे हैं तेरे मुँह पर तेरी हम ने कभी न की ता'रीफ़ ज़रा लिखने बैठे तो काग़ज़ पर रख दिए चाँद सितारे हैं — Ajmal Siddiqui
खुल के बरसना और बरस कर फिर खुल जाना देखा है हम से पूछो!! उन आँखों का एक ज़माना देखा है तुम ने कैसे मान लिया वो थक कर बैठ गया होगा तुम ने तो ख़ुद अपनी आँखों से वो दीवाना देखा है मंज़िल तक पहुँचें कि न पहुँचें राह मगर अपनी होगी तू रहने दे वाइज़ तेरा राह बताना देखा है धूल का इक ज़र्रा न उड़े आवाज़ करे परछाईं भी मौत भी आ कर मरती नहीं थी वो वीराना देखा है गुलशन से हम सीख न पाए वक़्ती ख़ुशियों को जीना जबकि हम ने फ़स्ल-ए-गुल का आना जाना देखा है दिल तो सादा है तेरी हर बात को सच्चा मानता है अक़्ल ने बातें करते तेरा आँख चुराना देखा है लफ़्ज़ दवा है लेकिन इस के साथ ही कुछ परहेज़ भी है लफ़्ज़ के बाइस पल में खोना पल में पाना देखा है — Ajmal Siddiqui
गुल था बुलबुल थी गुलिस्ताँ में मगर तू ही न था क्या गुलिस्ताँ वो गुलिस्ताँ था अगर तू ही न था शोर-ओ-हंगामा तो आशिक़ को नहीं देता है ज़ेब सब ही ज़ख़्मी थे वहाँ ज़ेर-ओ-ज़बर तू ही न था रंग कितने थे मगर तुझ को न था शौक़-ए-हयात हम-सफ़र कितने थे मुश्ताक़-ए-सफ़र तू ही न था चाह शोहरत कि न कर पर तू यूँँ रुस्वा तो न हो तेरी ख़ातिर थी सजी बज़्म-ए-हुनर तू ही न था कैसा मंज़र हो बिना नूर-ए-नज़र कुछ भी नहीं कैसे मंज़र थे पर ऐ नूर-ए-नज़र तू ही न था मुझ को ख़दशा था कि तू जादू है पर छू ही लिया वही आख़िर को हुआ जिस का था डर तू ही न था आश्ना तू ही था शे'रों के इशारों से मिरे क्या ही फिर करता भला अर्ज़-ए-हुनर तू ही न था — Ajmal Siddiqui