Azhar Iqbal

Azhar Iqbal

@azhar-iqbal

Azhar Iqbal shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Azhar Iqbal's shayari and don't forget to save your favorite ones.

Followers

337

Content

31

Likes

1479

Shayari
Audios
  • Sher
  • Ghazal
गुलाब चाँदनी-रातों पे वार आए हम
तुम्हारे होंटों का सदक़ा उतार आए हम
Azhar Iqbal
48 Likes
माँग सिन्दूर भरी हाथ हिनाई करके
रूप जोबन का ज़रा और निखर आएगा

जिसके होने से मेरी रात है रौशन रौशन
चाँद में आज वही अक्स नज़र आएगा
Read Full
Azhar Iqbal
66 Likes
गुमान है या किसी विश्वास में है
सभी अच्छे दिनों की आस में है

ये कैसा जश्न है घर वापसी का
अभी तो राम ही वनवास में है
Read Full
Azhar Iqbal
65 Likes
ये भ्रामक प्रकाश ये कल्पित दीप उत्सव
दृष्टिहीन हुए तो ये सब पाया है

मर्यादा पुरूषोत्तम तो वनवास में है
सन्यासी के भेष में रावण आया है
Read Full
Azhar Iqbal
49 Likes
जब भी उसकी गली में भ्रमण होता है
उसके द्वार पर आत्मसमर्पण होता है

किस किस से तुम दोष छुपाओगे अपने
प्रिये अपना मन भी दर्पण होता है
Read Full
Azhar Iqbal
83 Likes
इतना संगीन पाप कौन करे
मेरे दुख पर विलाप कौन करे

चेतना मर चुकी है लोगों की
पाप पर पश्चाताप कौन करे
Read Full
Azhar Iqbal
105 Likes
गाली को प्रणाम समझना पड़ता है
मधुशाला को धाम समझना पड़ता है

आधुनिक कहलाने की अंधी जिद में
रावण को भी राम समझना पड़ता है
Read Full
Azhar Iqbal
97 Likes
हर एक सम्त यहाँ वहशतों का मस्कन है
जुनूँ के वास्ते सहरा ओ आशियाना क्या
Azhar Iqbal
28 Likes
फिर इस के बाद मनाया न जश्न ख़ुश्बू का
लहू में डूबी थी फ़स्ल-ए-बहार क्या करते
Azhar Iqbal
35 Likes
हर एक शख़्स यहाँ महव-ए-ख़्वाब लगता है
किसी ने हम को जगाया नहीं बहुत दिन से
Azhar Iqbal
30 Likes
है अब भी बिस्तर-ए-जाँ पर तिरे बदन की शिकन
मैं ख़ुद ही मिटने लगा हूँ उसे मिटाते हुए
Azhar Iqbal
46 Likes
न जाने ख़त्म हुई कब हमारी आज़ादी
तअल्लुक़ात की पाबंदियाँ निभाते हुए
Azhar Iqbal
34 Likes
हुआ ही क्या जो वो हमें मिला नहीं
बदन ही सिर्फ़ एक रास्ता नहीं

ये पहला इश्क़ है तुम्हारा सोच लो
मेरे लिए ये रास्ता नया नहीं
Read Full
Azhar Iqbal
293 Likes
एक मुद्दत से हैं सफ़र में हम
घर में रह कर भी जैसे बेघर से
Azhar Iqbal
41 Likes
ये कैफ़ियत है मेरी जान अब तुझे खो कर
कि हम ने ख़ुद को भी पाया नहीं बहुत दिन से
Azhar Iqbal
37 Likes
घुटन सी होने लगी उस के पास जाते हुए
मैं ख़ुद से रूठ गया हूँ उसे मनाते हुए
Azhar Iqbal
63 Likes
नींद आएगी भला कैसे उसे शाम के बा'द
रोटियाँ भी न मयस्सर हों जिसे काम के बा'द
Azhar Iqbal
45 Likes
तुम्हारे आने की उम्मीद बर नहीं आती
मैं राख होने लगा हूँ दिए जलाते हुए
Azhar Iqbal
55 Likes
चले भी आओ भुला कर सभी गिले-शिकवे
बरसना चाहिए होली के दिन विसाल का रंग
Azhar Iqbal
47 Likes