मेरे माँ बाप मेरे हक़ में दुआ करते हैं
उनके जो बस में है हर रस्म अदा करते हैं
कहने वाले भी बहुत खूब कहा करते हैं
करनी हो जिनको वो हर हाल दग़ा करते हैं
उसका दीदार है हर दर्द में राहत का सबब
सो उसे देखते रहने की ख़ता करते हैं
फूल खिलते ही बता देती है ख़ुशबू क्या क्या
वो जो हँस दे तो निहाँ राज़ खुला करते हैं
एक हैं वो कि मोहब्बत में नहीं लगता जी
और इक हम हैं तहे दिल से वफ़ा करते हैं
जब कभी लगने लगे जान से प्यारा कोई
हम उसी वक़्त उसे ख़ुद से जुदा करते हैं
अब भला वो भी बताएँगे हमें 'इश्क़ है क्या
जो कि हर रोज़ नया 'इश्क़ किया करते हैं
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