तो फिर दुख भी लगता है कम कम हमारा
अगर साथ होता है हमदम हमारा
मुहब्बत बचाकर के रक्खी है यूँँ भी
किसी से कभी होगा संगम हमारा
मेरी जाँ कहीं के रहोगे नहीं तुम
दिखाने पे हम आए जो दम हमारा
हमें बस बता दो कि आना कहाँ है
ख़ुदी हम बना लेंगे मौसम हमारा
नए से नए ज़ख़्म देता है अब तो
कभी 'इश्क़ होता था मरहम हमारा
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