"नादान परी"
वो मेरी नादान परी
सब से छिपकर रहती थी
अक्सर मुझ से कहती थी
छोड़ो प्यार व्यार की बातें
हिस्से आती तन्हा रातें
इस से क्या ही मिल पाएगा
जो है वो भी ख़ो जाएगा
मैं ने सोचा सच ही तो है
प्यार किसे ही मिल पाया है
इस को तो एहसास दिला दूँ
दुनिया से भी मैं लड़ लूँगा
क़िस्मत से कैसे जीतूँगा
मैं तो ये ग़म पाल ही लूँगा
टूटा दिल सँभाल ही लूँगा
वो तो सचमुच मर जाएगी
और फिर कुछ ना कर पाएगी
उस को एक जीवन जीना है
मुझ को हर आँसू पीना है
वैसे भी क्या ही है मुझ
में
मेरे जैसे कितने होंगे
मेरे होने से क्या होगा
बस इक गिनती बढ़ जाएगी
उस के आगे अड़ जाएगी
मेरा जाना ही बेहतर है
साँस ही लेनी है ले लूँगा
जान ही देनी है दे दूँगा
जान तो वैसे भी उस की है
उस को कहाँ मालूम है इतना
वो मेरी नादान परी















