यूँँ तो अच्छे से जानते थे मुझे
फिर भी हल्के में ले रहे थे मुझे
उस की ख़ुशबू ने कर दिया हैरान
वो जिसे फूल भेजने थे मुझे
क्यूँ न चढ़ता नशा मोहब्बत का
आप के ख़्वाब आ चुके थे मुझे
कामयाबी से पहले अपने भी
कैसी नज़रों से देखते थे मुझे
अब तड़पता हूँ याद कर उस को
जिस के होने से मसअले थे मुझे
हाथ जब तक था बाप का सर पर
शे'र भी जैसे भेड़िए थे मुझे
इश्क़ के ज़िक्र से भी डरने लगा
इश्क़ के ऐसे तजरबे थे मुझे
— Rohit tewatia 'Ishq'















